IDFC Bank Fraud : सीबीआई ने दर्ज की FIR; सीएम सैनी ने दो IAS अधिकारियों को किया सस्पेंड, कोटक बैंक को भी पैनल से हटाया
एंटी करप्शन ब्यूरो की एफआईआर बनी बेस, , 590 करोड़ से शुरू हुआ खेल अब 28 हजार करोड़ तक फैलने की आशंका
IDFC Bank Fraud : हरियाणा में सरकारी फंड से जुड़े बैंक घोटाले में बड़ी कार्रवाई हुई है। हरियाणा की नायब सरकार की सिफारिश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस केस को अपने हाथों में लेते हुए नई दिल्ली में एफआईआर दर्ज की है। वहीं दूसरी ओर, नायब सरकार ने दो आईएएस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। इन दोनों अधिकारियों के नाम आईडीएफसी फर्स्ट बैंक व कोटेक महेंद्रा बैंक घोटाले में जुड़े बताए जा रहे हैं।
सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसी जल्द ही पंचकूला और चंडीगढ़ में टीम तैनात कर बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और अन्य सबूत जुटाने के साथ ही एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) से पूरे दस्तावेज़ भी हासिल करेगी। अधिकारियों के कथित फर्जी हस्ताक्षर, शेल कंपनियों और फंड डायवर्जन की पूरी गुत्थी अब खुलेगी, जिससे हरियाणा के प्रशासनिक और वित्तीय तंत्र में भूचाल आ गया है।
दो आईएएस अधिकारी सस्पेंड
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आईएएस अधिकारियों पर सख्त रुख अपनाया है। प्रदीप कुमार-। (परिवहन विभाग निदेशक व विशेष सचिव) और राम कुमार सिंह (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव) को निलंबित कर दिया गया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने दोनों के निलंबन आदेश जारी किए हैं। आदेशों में सस्पेंड करने के कारणों का खुलासा नहीं किया है। प्रदीप कुमार कुछ ही महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले थे, जबकि राम कुमार सिंह के लिए डेढ़ वर्ष की सेवा अभी बाकी थी।
ट्रांसफर से भी दी सजा!
दो आईएएस अधिकारियों को सस्पेंड करने से पहले बुधवार की रात नायब सरकार पंद्रह आईएएस अधिकारियों के तबादले भी कर चुकी है। इनमें पांच आईएएस अधिकारी वे बताए जा रहे हैं, जिनके नाम बैंक खाते खुलवाने व एफडी आदि करवाने में जुड़े बताए गए हैं। माना जा रहा है कि सरकार ने इसी वजह ने इन अधिकारियों को प्राइम पदों से हटाकर उनकी पोस्टिंग अब ‘खुड्डेलाइन’ की है। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में आधा दर्जन से अधिक अधिकारियों पर और कार्रवाई की संभावना है।
इस तरह हुआ खेल
जांच में सामने आया है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, कोटेक महेंद्रा बैंक और एयू स्माल फाइनेंस बैंक के माध्यम से सरकारी धन को शेल कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। एंटी करप्शन ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी खजाने के पैसे स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट, एसआरआर प्लानिंग गुरु प्राइवेट लिमिटेड, कैप-को फिनटेक सर्विसेज, आरएस ट्रेडर्स जैसी फर्मों के खातों में भेजे गए। पंचायत विभाग के एमएमजीएवी-20. स्कीम के तहत खाते खोले गए थे। आईडीएफसी बैंक ने 46.56 करोड़ रुपये एयू स्माल फाइनेंस बैंक में भेजे, जबकि एयू बैंक ने 25.45 करोड़ एक्सिस बैंक में डायवर्ट किए। कई चेक में फर्जी हस्ताक्षर पाए गए, और अंक तथा शब्दों में राशि में अंतर की वजह से भी रकम गलत तरीके से क्लियर हो गई।
कोटक महिंद्रा बैंक को पैनल से हटाया
हरियाणा सरकार ने कोटक महिंद्रा बैंक को पैनल से हटा दिया है। वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सभी सचिवों और विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए कि बैंक में रखे सभी सरकारी खातों की राशि ट्रांसफर कर खातों को बंद किया जाए। पंचकूला नगर निगम के 160 करोड़ रुपये से जुड़े केस में कोटक बैंक ने अब तक केवल 127 करोड़ रुपये लौटाए हैं, जो मूलधन को ही कवर करता है। अब इस बैंक के माध्यम से कोई भी सरकारी लेनदेन नहीं होगा।
28 हजार करोड़ तक संभावित स्केल
अब तक सामने आए आंकड़ों में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में करीब 590 करोड़ और पंचकूला नगर निगम से जुड़े 160 करोड़ रुपये की गड़बड़ की पुष्टि हुई है। सूत्रों के अनुसार, यदि पूरे नेटवर्क और शेल कंपनियों की जांच की गई तो घोटाले का पैमाना करीब 28 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में स्पष्ट कर दिया था कि दोषी चाहे कितना भी बड़ा हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा और हर पाई-पाई सरकारी फंड की रिकवरी सुनिश्चित की जाएगी। इसके तहत बड़ी रकम रिकवर भी की गई है, लेकिन अब फोकस पूरे नेटवर्क को उजागर करने पर है।
यह हो सकती आगे की राह
सीबीआई की टीम बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और अन्य डिजिटल सबूत जुटाकर पंचकूला और चंडीगढ़ में छापेमारी कर सकती है। दस्तावेज़ों की समीक्षा और इंटरव्यू के बाद जांच और व्यापक हो सकती है। यदि सभी पहलुओं की जांच हुई तो यह हरियाणा के 18 विभागों के पैसों के दुरुपयोग का यह मामला हजारों करोड़ तक पहुंच सकता है। इस पूरी जांच और कार्रवाई ने राज्य में अफसरशाही को हिला कर रख दिया है। निलंबन और तबादले ने प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मचा दिया है। आने वाले दिनों में सीबीआई की छापेमारी और दस्तावेजों की पड़ताल पूरे घोटाले का असली चेहरा सामने ला सकती है।

