भारतीय बनकर लेना चाहती हूं आखिरी सांस; देश के लिए अनोखा प्यार, 94 साल की महालक्ष्मम्मा ने छोड़ी अमेरिकी नागरिकता
94 साल की महिला ने भारतीय बनकर मरने की अपनी आखिरी इच्छा के लिए अमेरिकी नागरिकता छोड़ी
US-India Citizenship : आंध्र प्रदेश में 94 साल की एक महिला ने भारतीय के रूप में अंतिम सांस लेने की इच्छा से अमेरिका की अपनी नागरिकता त्याग दी है। बापटला के जिलाधिकारी वी. विनोद कुमार ने बताया कि के. महालक्ष्मम्मा पिछले दो दशक से अधिक समय तक अमेरिका में रहीं और अपने गृह राज्य लौटने के लिए उन्होंने अमेरिका की अपनी नागरिकता छोड़ दी। महालक्ष्मम्मा ने इच्छा जताई कि उनकी मृत्यु एक भारतीय नागरिक के रूप में हो।
कुमार ने आयोजित नागरिकता शपथ ग्रहण समारोह का उल्लेख करते हुए कहा कि वह अपने जीवन के अंतिम दिन अपने देश और अपने पैतृक गांव में बिताना चाहती हैं और उनकी इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार भी यहीं किया जाए। यह बेहद भावुक कर देने वाला अवसर था। बापटला जिले के चिंतागुम्पला गांव की मूल निवासी महालक्ष्मम्मा अपने पति नागभूषणम के निधन के बाद अपने पुत्र के साथ रहने के लिए अमेरिका चली गई थीं। उनका बेटा पेशे से कैंसर रोग एक्सपर्ट है।
महालक्ष्मम्मा ने 27 जुलाई, 2000 को अमेरिकी नागरिकता ग्रहण की, कई सालों तक वहां रहीं और साल 2018 में अपने परिवार के साथ भारत लौट आईं। कुमार ने बताया कि महालक्ष्मम्मा के बेटे कोंद्रुगुंटा के. पिच्चैय्या वर्तमान में गुंटूर स्थित एनआरआई मेडिकल कॉलेज के निदेशक हैं और तब से परिवार अपने पैतृक गांव में ही रह रहा है। महालक्ष्मम्मा ने भारतीय नागरिकता बहाल किए जाने का अनुरोध करते हुए एक जून को ऑनलाइन आवेदन किया था।
नागरिकता संबंधी अपने अधिकारों की बहाली के लिए राज्य सचिवालय से भी संपर्क करने के बाद मंगलवार को उनके आवेदन पर जांच प्रक्रिया शुरू की गई। उन्होंने बताया कि भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के इच्छुक प्रत्येक आवेदक के लिए नागरिकता अधिनियम के तहत भारत के संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लेना अनिवार्य है। यह शपथ जिलाधिकारी के समक्ष ली जाती है।

