Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
Add Tribune As Your Trusted Source
search-icon-img
Advertisement

स्क्रॉल करते-करते घंटों बीत जाते हैं... सोशल मीडिया की लत पर दिल्ली HC सख्त, ऑटोप्ले को लेकर केंद्र से मांगा जवाब

वीडियो अपने आप चले या स्क्रॉल खत्म ही न हो... दिल्ली HC ने केंद्र से पूछा- नीति बनाएंगे?

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

Social Media Addiction : दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से यह बताने को कहा कि क्या वह सोशल मीडिया मंचों पर लत लगाने वाले फीचर, जैसे 'इन्फाइनाइट स्क्रॉल' और 'ऑटोप्ले' (वीडियो का अपने आप चलना) को विनियमित करने के लिए कोई नीति बनाने पर विचार कर रही है। न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव सांब्रे और न्यायमूर्ति अमित शर्मा की पीठ ने कहा कि वह इस मामले में एक जनहित याचिका पर सुनवाई तीन सप्ताह बाद करेगी। इस जनहित याचिका में सोशल मीडिया मंच के उपयोगकर्ताओं को अधिक समय तक जोड़े रखने और लत पैदा करने वाली 'स्क्रॉल' और 'ऑटोप्ले' जैसी डिजाइन सुविधाओं की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है।

अदालत द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या केंद्र सरकार इस मुद्दे पर कोई नीति बनाने पर विचार कर रही है, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई विशेष निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। इस पर पीठ ने मौखिक रूप से कहा, ''आप यह निर्देश लें कि क्या आप नीति बनाने पर विचार कर रहे हैं और हम मामले की सुनवाई तीन सप्ताह बाद करेंगे।'' शर्मा ने यह भी कहा कि जनहित याचिका में कुछ मुद्दे उठाए गए हैं, लेकिन इन पर विचार करना नीति-निर्माताओं के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता इस संबंध में सरकार को एक अभ्यावेदन दे सकता है।

Advertisement

केंद्र सरकार और कुछ सोशल मीडिया मंचों की ओर से पेश वकीलों ने याचिका पर आपत्ति जताई और कहा कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट पहले इसी तरह के मुद्दों से संबंधित कुछ याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर चुके हैं। विधि के प्रोफेसर एवं याचिकाकर्ता विकास कथूरिया ने कहा कि मुद्दे का केंद्र यह नहीं है कि सोशल मीडिया मंच पर किस तरह की सामग्री उपलब्ध है, बल्कि यह है कि इन मंच को किस तरह डिजाइन किया गया है कि वे उपयोगकर्ताओं को 'इन्फाइनाइट स्क्रॉल', 'ऑटोप्ले' और एल्गोरिद्म द्वारा चुने एवं व्यक्तिगत पंसद अनुरूप बनाए गए फीड के जरिये बार-बार उनका ध्यान अपनी ओर खींचते हैं।

Advertisement

याचिका में कहा गया कि भारत के संदर्भ में यह चिंता और महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि आंकड़ों के अनुसार 18 से 24 वर्ष की आयु के भारतीय युवा रोजाना औसतन 120 मिनट से अधिक समय सोशल मीडिया पर बिताते हैं। अधिवक्ताओं कार्तिका शर्मा, हर्षा साधवानी और सुभिका जोशी के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया कि चिकित्सकीय रूप से यह साबित हो चुका है कि सोशल मीडिया पर काफी देर तक समय बिताये जाने का संबंध किशोरों में आत्महत्या और अवसाद से जुड़ा है।

Advertisement
×