PMLA Court Haryana : एजेएल प्लॉट मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और एजेएल को बड़ी राहत, ईडी का केस बंद
पंचकूला कोर्ट का फैसला
PMLA Court Haryana : हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और मेसर्स एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को कानूनी मोर्चे पर शुक्रवार को बड़ी सफलता मिली है। पंचकूला की विशेष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर शिकायत को बंद करने का आदेश दिया है। यह फैसला हरियाणा के प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) कोर्ट के विशेष न्यायाधीश राजीव गोयल ने सुनाया।
यह घटनाक्रम तब हुआ जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 25 फरवरी को मुख्य सीबीआई मामले में हुड्डा और एजेएल को पहले ही आरोपमुक्त (Discharge) कर दिया था। अदालत का यह निर्णय मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों पर आधारित है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बना आधार
हुड्डा के वकील एस.पी.एस. परमार के अनुसार, पंचकूला की पीएमएलए अदालत ने ईडी मामले को इसलिए बंद किया क्योंकि मुख्य अपराध (Predicate Offense) से जुड़ा मामला हाईकोर्ट में पहले ही सुलझ चुका है। उन्होंने विजय मदनलाल चौधरी बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया।
अदालत ने माना कि यदि किसी व्यक्ति को मुख्य अपराध से बरी या आरोपमुक्त कर दिया जाता है, या सक्षम न्यायालय द्वारा मामला रद्द कर दिया जाता है, तो उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का कोई मामला नहीं बनता। इसी कानूनी सिद्धांत के तहत, जब सीबीआई मामले में हुड्डा को राहत मिली, तो ईडी की शिकायत का अस्तित्व स्वतः ही समाप्त हो गया।
क्या था विवादित प्लॉट का मामला ?
यह मामला पंचकूला के सेक्टर-6 स्थित प्लॉट संख्या सी-17 के पुनर्वितरण से जुड़ा है। यह प्लॉट मूल रूप से 1982 में समाचार पत्र शुरू करने के लिए 91 रुपये प्रति वर्ग मीटर की रियायती दर पर एजेएल को आवंटित किया गया था। दो साल में निर्माण न होने के कारण इसे वापस ले लिया गया था।
साल 2005 में हुड्डा सरकार के आने के बाद, एजेएल ने फिर से आवेदन किया। आरोप था कि हुड्डा ने हुडा (HUDA) के अध्यक्ष के रूप में अधिकारियों की राय को दरकिनार करते हुए, 1982 की पुरानी दरों (59.39 लाख रुपये) पर प्लॉट के पुनर्वितरण का आदेश दिया। ईडी का दावा था कि इससे राज्य सरकार को 1.75 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
इससे पहले 25 फरवरी को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई की विशेष अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें हुड्डा और एजेएल के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि केवल नीतियों या दिशानिर्देशों के विपरीत आदेश देना ही किसी आरोपी की बेईमानी का आधार नहीं हो सकता।
अदालत ने यह भी कहा कि मुकदमे को जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। ईडी ने यह भी आरोप लगाया था कि एजेएल ने इस संपत्ति पर 72.57 करोड़ रुपये का ऋण लिया था, लेकिन अब इन सभी आरोपों पर कानूनी रोक लग गई है। यह प्लॉट हिंदी दैनिक समाचार पत्र "नवजीवन" के प्रकाशन के लिए आवंटित किया गया था।

