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Holi 2026 : भक्ति का रंग और टेसू की खुशबू... वृन्दावन में शुरु रंगभरी एकादशी होली, मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

रंगभरी एकादशी से वृन्दावन के मंदिरों में होली उत्सव की शुरुआत

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Holi 2026 : रंगभरी एकादशी से शुक्रवार को वृन्दावन के मंदिरों में होली उत्सव की शुरुआत हो गई, जहां प्रमुख मंदिरों के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें देखी गईं और पूरा शहर पारंपरिक 'रसिया' भजनों से गूंज उठा। बांके बिहारी मंदिर में पुजारियों ने कहा कि उत्सव की शुरुआत भगवान बांके बिहारी द्वारा प्रतीकात्मक रूप से भक्तों के साथ होली खेलने के साथ हुई। मंदिर के सेवायत (पुजारी) ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने कहा कि अनुष्ठान की शुरुआत ठाकुर जी द्वारा राधा रानी पर केसर, गुलाब जल, टेसू का अर्क और पिचकारी से इत्र से भरा पानी छिड़कने से हुई।

गोस्वामी ने इस त्योहार की शुरुआत द्वापर युग से बताते हुए कहा कि ऐसा माना जाता है कि राधा ने सबसे पहले भगवान कृष्ण के गालों पर रंग लगाया था, जो ब्रज में होली की परंपराओं की शुरुआत का प्रतीक था। एकादशी अनुष्ठान के बाद, भगवान को प्रसाद के रूप में गुजिया और जलेबी अर्पित की गई। उन्होंने कहा, ''बांके बिहारी ने इस अवसर के लिए सफेद पोशाक पहनी और धुलंडी तक ऐसा करना जारी रखेंगे, जब वह गुलाबी वस्त्र पहनेंगे। सुबह और शाम, दोनों पहर के दर्शनों के दौरान होली उत्सव मनाया जाएगा।''

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इतिहासकार प्रह्लाद बल्लभ गोस्वामी ने कहा कि ब्रज में 'होली रसिया' गाने की परंपरा का एक लंबा इतिहास है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों कवियों द्वारा रचनाएं लिखी गई हैं। सुबह से ही 'आज बिरज में होली रे रसिया' जैसे भजन न सिर्फ मंदिरों में बल्कि वृन्दावन की तंग गलियों में भी गूंजते रहे। बांके बिहारी मंदिर के एक अन्य सेवायत अनंत गोस्वामी ने कहा कि स्वामी हरिदास भगवान की पूजा करते समय भक्ति छंद गाते थे और यह प्रथा आज भी जारी है। भक्तों ने भगवान के साथ फूलों की होली भी खेली, जबकि आने वाले दिनों में लड्डू होली और जलेबी होली का कार्यक्रम है। मंदिर के सेवायत शशांक गोस्वामी ने कहा कि भारी भीड़ के बावजूद भक्तों ने अपने प्रिय देवता के साथ होली खेलते हुए जबरदस्त उत्साह दिखाया।

हालांकि, उन्होंने आवाजाही से जुड़े प्रशासनिक प्रतिबंधों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और स्थानीय निवासियों को असुविधा होती है। मंदिर के पुजारी कृष्ण बलराम गोस्वामी ने कहा कि राधा दामोदर मंदिर में 200 से अधिक विदेशी भक्तों ने पिछली शाम के दर्शन के दौरान शुरू हुए उत्सव में भाग लिया। देवताओं ने बसंती (पीली) पोशाक पहनकर चांदी की पिचकारी से होली खेली और भक्तों के बीच प्रसाद वितरित किया गया। राधा बल्लभ मंदिर के सुकराती लाल गोस्वामी ने कहा कि शाम के होली समारोह के लिए भक्तों को आमंत्रित करने के लिए ढोल और नगाड़ों के साथ एक शोभायात्रा वृन्दावन के प्रमुख इलाकों से होकर गुजरेगी।

उन्होंने कहा कि यह दिन मंदिर के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह देवता के दिव्य विवाह का जश्न मनाता है। प्रमुख संत स्वामी अवशेषानंद ने कहा कि ब्रज में होली पर भक्त भगवान कृष्ण और राधा की भक्ति में गाते और नृत्य करते हैं। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा कि अधिकारियों को हानिकारक और रसायन आधारित रंगों के उपयोग की जांच करने का निर्देश दिया गया है। परिक्रमा मार्ग पर पुलिस, अग्निशमन, बिजली और स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों को तैनात किया गया है और ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को भक्तों के प्रति विनम्र रहने का निर्देश दिया गया है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने कहा कि पुलिस को कड़ी निगरानी रखने और उपद्रवियों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के प्रति अनुचित व्यवहार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि अधिकारी अफवाहों पर नजर रख रहे हैं और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अस्पतालों, पार्किंग सुविधाओं, पुलिस सहायता केंद्रों और स्वास्थ्य शिविरों के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए एक क्यूआर कोड प्रणाली विकसित की गई है।

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