रचा गया इतिहास : राम मंदिर का भूमि पूजन संपन्न, प्रधानमंत्री मोदी ने रखी आधारशिला

अयोध्या, 5 अगस्त (एजेंसियां)

अयोध्या में बुधवार को इतिहास रचा गया। वर्षों तक अदालत में मामला चलने के बाद आज राम मंदिर की नींव पड़ गयी। अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार दोपहर 12 बजकर 44 मिनट और 8 सेकेंड पर शुभ मुहूर्त में राम मंदिर निर्माण के लिये भूमिपूजन संपन्न कर मंत्रोच्चारण के बीच आधारशिला रखी। मोदी ने राम जन्मभूमि की मिट्टी से तिलक किया और श्रीराम को साष्टांग प्रणाम किया। इससे पहले पीएम मोदी ने अयोध्या पहुंचकर सबसे पहले हनुमानगढ़ी मंदिर में पूजा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परिसर में पारिजात के पौधे को भी लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने पौधे को पानी भी दिया और वहां उपस्थित लोगों से बात की। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास सहित बड़ी संख्या में साधु-संत मौजूद थे।

‘श्री राम जन्मभूमि मंदिर' से संबंधित विशेष डाक टिकट जारी

प्रधानमंत्री ने मंदिर निर्माण की आधारशिला से संबंधित एक पट्टिका का अनावरण किया और इस मौके पर ‘श्री राम जन्मभूमि मंदिर' से संबंधित विशेष डाक टिकट भी जारी किया। मोदी ने पारंपरिक धोती-कुर्ता पहना हुआ था।

अयोध्या में राम मंदिर से संबंधित घटनाक्रम

  • 1528 : मुगल बादशाह बाबर के कमांडर मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया
  • 1885 : महंत रघुबीर दास ने फैजाबाद जिला अदालत में याचिका दायर कर विवादित ढांचे के बाहर छतरी के निर्माण की अनुमति मांगी। अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
  • 1949 : विवादित ढांचे के बाहर केंद्रीय गुंबद में रामलला की मूर्तियां स्थापित की गईं।
  • 1950 : रामलला की मूर्तियों की पूजा का अधिकार हासिल करने के लिए गोपाल सिमला विशारद ने फैजाबाद जिला अदालत में याचिका दायर की।
  • 1950: परमहंस रामचंद्र दास ने पूजा जारी रखने और मूर्तियां रखने के लिए याचिका दायर की।
  • 1959 : निर्मोही अखाड़ा ने जमीन पर अधिकार दिए जाने के लिए याचिका दायर की।
  • 1961 : उत्तर प्रदेश सुन्नी केंद्रीय वक्फ बोर्ड ने स्थल पर अधिकार के लिए याचिका दायर की।
  • एक फरवरी, 1986 : स्थानीय अदालत ने सरकार को पूजा के मकसद से हिंदू श्रद्धालुओं के लिए स्थान खोलने का आदेश दिया।
  • 14 अगस्त, 1989 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित ढांचे के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।
  • 6 दिसम्बर, 1992 : बाबरी मस्जिद ढांचे को ढहाया गया।
  • 3 अप्रैल, 1993 : विवादित स्थल में जमीन अधिग्रहण के लिए केंद्र ने 'अयोध्या में निश्चित क्षेत्र अधिग्रहण कानून' पारित किया। अधिनियम के विभिन्न पहलुओं को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में कई रिट याचिकाएं दायर की गईं। इनमें इस्माइल फारूकी की याचिका भी शामिल थी। सुप्रीमकोर्ट ने अनुच्छेद 139ए के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर रिट याचिकाओं को स्थानांतरित कर दिया जो हाईकोर्ट में लंबित थीं।
  • 24 अक्तूबर, 1994 : सुप्रीमकोर्ट ने ऐतिहासिक इस्माइल फारूकी मामले में कहा कि मस्जिद इस्लाम से जुड़ी हुई नहीं है।
  • अप्रैल, 2002 : हाईकोर्ट में विवादित स्थल के मालिकाना हक को लेकर सुनवाई शुरू।
  • 13 मार्च, 2003 : सुप्रीमकोर्ट ने असलम उर्फ भूरे मामले में कहा, अधिग्रहीत स्थल पर किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं है।
  • 30 सितम्बर, 2010 : हाईकोर्ट ने 2:1 के बहुमत से विवादित क्षेत्र को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच तीन हिस्सों में बांटने का आदेश दिया।
  • 9 मई, 2011 : सुप्रीमकोर्ट ने अयोध्या जमीन विवाद में हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई।
  • 26 फरवरी, 2016 : सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीमकोर्ट में याचिका दायर कर विवादित स्थल पर राम मंदिर बनाए जाने की मांग की।
  • 21 मार्च, 2017 : सीजेआई जे एस खेहर ने संबंधित पक्षों के बीच अदालत के बाहर समाधान का सुझाव दिया।
  • 7 अगस्त : सुप्रीमकोर्ट ने 1994 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 3 सदस्यीय पीठ का गठन किया।
  • 8 अगस्त : उत्तर प्रदेश शिया केंद्रीय वक्फ बोर्ड ने सुप्रीमकोर्ट से कहा कि विवादित स्थल से उचित दूरी पर मुस्लिम बहुल इलाके में मस्जिद बनाई जा सकती है।
  • 11 सितम्बर : सुप्रीमकोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को निर्देश दिया कि 10 दिनों के अंदर 2 अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति करें जो विवादिस्त स्थल की यथास्थिति की निगरानी करे।
  • 20 नवम्बर : उप्र शिया केंद्रीय वक्फ बोर्ड ने सुप्रीमकोर्ट से कहा कि मंदिर का निर्माण अयोध्या में किया जा सकता है और मस्जिद का लखनऊ में।
  • एक दिसम्बर : इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2010 के फैसले को चुनौती देते हुए 32 मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने याचिका दायर की।
  • 8 फरवरी, 2018 : दीवानी याचिकाओं पर सुप्रीमकोर्ट ने सुनवाई शुरू की।
  • 14 मार्च: सुप्रीमकोर्ट ने स्वामी की याचिका सहित सभी अंतरिम याचिकाओं को खारिज किया।
  • 6 अप्रैल : राजीव धवन ने सुप्रीमकोर्ट में याचिका दायर कर 1994 के फैसले की टिप्पणियों पर पुनर्विचार के मुद्दे को बड़े पीठ के पास भेजने का आग्रह किया।
  • 6 जुलाई : उप्र सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में कहा कि कुछ मुस्लिम समूह 1994 के फैसले की टिप्पणियों पर पुनर्विचार की मांग कर सुनवाई में विलंब करना चाहते हैं।
  • 20 जुलाई: सुप्रीमकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।
  • 27 सितंबर : सुप्रीमकोर्ट ने मामले को 5 सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष भेजने से इनकार किया। मामले की सुनवाई 29 अक्तूबर को 3 सदस्यीय नयी पीठ द्वारा किए जाने की बात कही।
  • 29 अक्तूबर: सुप्रीमकोर्ट ने मामले की सुनवाई उचित पीठ के समक्ष जनवरी के पहले हफ्ते में करना तय किया जिसे सुनवाई के समय पर निर्णय करना था।
  • 12 नवम्बर: अखिल भारत हिंदू महासभा की याचिकाओं पर जल्द सुनवाई से सुप्रीमकोर्ट का इनकार।
  • 24 दिसंबर: सुप्रीमकोर्ट ने मामले में याचिकाओं पर चार जनवरी को सुनवाई का फैसला किया।
  • 4 जनवरी, 2019 : सुप्रीमकोर्ट ने कहा कि मालिकाना हक मामले में सुनवाई की तारीख तय करने के लिए उसके द्वारा गठित उपयुक्त पीठ 10 जनवरी को फैसला सुनाएगी।
  • 8 जनवरी : सुप्रीमकोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 5 न्यायाधीशों की संविधान पीठ का गठन किया जिसकी अध्यक्षता चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने की और इसमें जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस एन वी रमन, जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ शामिल रहे।
  • 10 जनवरी : जस्टिस यू यू ललित ने मामले से खुद को अलग किया जिसके बाद सुप्रीमकोर्ट ने मामले की सुनवाई 29 जनवरी को नयी पीठ के समक्ष तय की।
  • 25 जनवरी: सुप्रीमकोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 5 सदस्यीय संविधान पीठ का पुनर्गठन किया। नयी पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस ए नजीर शामिल रहे।
  • 29 जनवरी: केंद्र ने सुप्रीमकोर्ट से विवादित स्थल के आसपास की 67 एकड़ अधिग्रहीत जमीन को मूल स्वामियों को वापसी करने की अनुमति मांगी।
  • 26 फरवरी: सुप्रीमकोर्ट ने मध्यस्थता का सुझाव दिया और इस बारे में फैसले के लिए 5 मार्च की तारीख तय की कि मामले को अदालत की तरफ से नियुक्त मध्यस्थ के पास भेजा जाए अथवा नहीं।
  • 8 मार्च : सुप्रीमकोर्ट ने मध्यस्थता के लिए विवाद को एक समिति के पास भेज दिया जिसके अध्यक्ष सुप्रीमकोर्ट के पूर्व जस्टिस एफएमआई कलीफुल्ला बनाए गए।
  • 9 अप्रैल: निर्मोही अखाड़े ने अयोध्या स्थल के आसपास की अधिग्रहीत जमीन को मालिकों को लौटाने की केन्द्र की याचिका का सुप्रीमकोर्ट में विरोध किया।
  • 9 मई: तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति ने सुप्रीमकोर्ट में अंतरिम रिपोर्ट सौंपी।
  • 10 मई: मध्यस्थता प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सुप्रीमकोर्ट ने 15 अगस्त तक समयसीमा बढ़ाई।
  • 11 जुलाई: सुप्रीमकोर्ट ने “मध्यस्थता की प्रगति” पर रिपोर्ट मांगी।
  • 18 जुलाई: सुप्रीमकोर्ट ने मध्यस्थता प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति देते हुए एक अगस्त तक परिणाम रिपोर्ट देने के लिये कहा।
  • एक अगस्त: मध्यस्थता की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत को दी गई।
  • 2 अगस्त : सुप्रीमकोर्ट ने मध्यस्थता प्रक्रिया विफल रहने पर 6 अगस्त से रोजाना सुनवाई का फैसला किया।
  • 6 अगस्त: सुप्रीमकोर्ट ने रोजाना के आधार पर भूमि विवाद पर सुनवाई शुरू की।
  • 4 अक्तूबर: अदालत ने कहा कि 17 अक्तूबर तक सुनवाई पूरी कर 17 नवंबर तक फैसला सुनाया जाएगा। सुप्रीमकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष को सुरक्षा प्रदान करने के लिये कहा।
  • 16 अक्तूबर: सुप्रीमकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा।
  • 9 नवंबर 2019 : सुप्रीमकोर्ट ने अयोध्या में पूरी 2.77 एकड़ विवादित भूमि राम लला को दी। केन्द्र और उत्तर प्रदेश प्रदेश सरकार को मस्जिद के निर्माण के लिये किसी प्रमुख स्थान पर 5 एकड़ जमीन मुसलमानों के देने का भी निर्देश दिया।
  • 5 फरवरी, 2020: प्रधानमंत्री ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिये 15 सदस्यीय न्यास की घोषणा संसद में की।
  • 19 फरवरी: राम मंदिर ट्रस्ट ने पदाधिकारियों की नियुक्ति की।
  • 5 अगस्त: प्रधानमंत्री मोदी ने अयोध्या में भूमि पूजन के बाद राम मंदिर की आधारशिला रखी।

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