पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक रिटायर्ड मेजर को विकलांगता पेंशन देने में देरी के लिए रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। मेजर ने अपनी सेवा के दौरान 24 सर्जरी करवाई थीं और उन्हें किडनी की बीमारी हो गई थी।
पुणे के रहने वाले मेजर (रि.) राजदीप दिनकर पंडेरे 15 सितंबर, 2012 को सेना में भर्ती हुए थे। जून 2017 में सैन्य ड्यूटी के दौरान उन्हें एक मेडिकल समस्या हो गई। उन्हें ‘सिस्टाइटिस सिस्टिका ग्लैंडुलरिस’ बीमारी होने का पता चला और उनकी सर्जरी हुई। उन्हें 2 सितंबर, 2022 को चंडीमंदिर (पंचकूला) में वेस्टर्न कमांड हॉस्पिटल में ‘रिलीज मेडिकल बोर्ड’ के सामने लाया गया और ‘लो मेडिकल कैटेगरी’ के तहत सेना से मुक्त करने की सिफारिश की गई। हालांकि, उनकी विकलांगता के बारे में यह राय दी गई कि यह न तो सैन्य सेवा के कारण हुई है और न ही सैन्य सेवा से बढ़ी है। इसके लिए कोई कारण भी नहीं बताया गया। दस साल की सेवा के बाद 14 सितंबर 2022 को उन्हें सेना से मुक्त कर दिया गया। विकलांगता पेंशन के लिए उनके अनुरोध को 23 नवंबर, 2022 को खारिज कर दिया गया।
चंडीमंदिर स्थित ‘सशस्त्र बल न्यायाधिकरण’ (एएफटी) की चंडीगढ़ पीठ ने 10 अक्तूबर, 2024 के अपने आदेश में उन्हें विकलांगता पेंशन का हकदार माना। इसके खिलाफ केंद्र सरकार की रिट याचिका को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने 28 जुलाई, 2025 को खारिज कर दिया। बेंच ने कहा कि मेजर पंडेरे के विकलांगता पेंशन के अधिकार पर कोई संदेह नहीं किया जा सकता।
ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सैन्य अधिकारियों ने उन्हें विकलांगता पेंशन नहीं दी, इसलिए उन्होंने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी।
जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने 30 अप्रैल को अपने आदेश में कहा, ‘पिछली सुनवाई के दौरान, प्रतिवादियों को ‘अनुपालन हलफनामा’ दायर करने का अंतिम अवसर दिया गया था। इसके साथ यह शर्त भी रखी गई थी कि यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो उन पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।’ आदेश में कहा गया है कि चूंकि कोई अनुपालन हलफनामा दायर नहीं किया गया, इसलिए एक और अवसर प्रदान किया गया, जो 2 लाख रुपये की लागत के भुगतान की शर्त पर था। यह राशि दोनों प्रतिवादियों (रक्षा सचिव और सेना प्रमुख) के वेतन से बराबर-बराबर काटी जाएगी और याचिकाकर्ता को डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से भुगतान की जाएगी।

