पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में स्वयं अपनी दलीलों को रखा और निर्वाचन आयोग पर राज्य को कथित तौर पर बेवजह निशाना बनाने और वहां के नागरिकों के अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने उनकी याचिका पर निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को नोटिस जारी कर नौ फरवरी तक जवाब मांगा है। पीठ ने उनकी ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान के साथ-साथ खुद उन्हें (ममता बनर्जी को) भी दलील पेश करने की अनुमति दी थी। ममता ने कहा, ‘वे पश्चिम बंगाल को निशाना बनाकर वहां के लोगों के अधिकारों को कुचलने की कोशिश कर रहे हैं। हमें कहीं न्याय नहीं मिल रहा है। मैंने निर्वाचन आयोग को छह पत्र लिखे हैं।’ सुनवाई के अंतिम चरण में ममता ने बहस करने का अवसर देने के लिए पीठ के प्रति आभार व्यक्त किया और उनसे ‘लोकतंत्र की रक्षा’ का आग्रह किया।
ममता की ओर से पेश हुए दीवान ने बड़ी संख्या में ‘अनमैप्ड’ मतदाताओं का हवाला दिया और कहा कि सुधारात्मक उपायों के लिए अब शायद ही समय बचा है क्योंकि यह प्रक्रिया 14 फरवरी को समाप्त होने वाली है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘हर समस्या का समाधान होता है और हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी निर्दोष व्यक्ति इससे वंचित न रह जाए।’ निर्वाचन आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने आरोपों का खंडन किया।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी!
विपक्षी दल मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) को हटाने के लिए महाभियोग लाने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रंस ने इस संबंध में कहा कि टीएमसी ने उससे संपर्क किया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी ममता बनर्जी का समर्थन किया। हालांकि, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

