Haryana: बरसात ने फसल डुबोई, बीमा ने उम्मीदें… विधानसभा में गूंजा किसानों का दर्द
Haryana: सरकार ने दिए दिए 120 करोड़, बीमा कंपनियों के 116 करोड़ पेडिंग
Haryana Assembly Session: विधानसभा का प्रश्नकाल शुक्रवार को किसानों के नाम रहा। कभी भारी बारिश से बर्बाद हुई खरीफ-2025 की फसलें चर्चा में रहीं, तो कभी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अटके हजारों बीमा क्लेम। आंकड़े बोले, सवाल चुभे और सरकार-विपक्ष के बीच किसान हित को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
सदन को बताया गया कि वर्ष 2025 में अत्यधिक बारिश और जलभराव से नुकसान केवल खरीफ-2025 की फसलों को हुआ। कई जिलों में खेत तालाब बन गए और खड़ी फसलें पानी में गल गईं। सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला और अगस्त–सितंबर के बीच दावे मंगवाए।
सत्यापन के बाद सरकार ने दावा किया कि 1,20,380 एकड़ में फसल नुकसान को मंजूरी दी गई और 55,076 किसानों के खातों में 116.16 करोड़ रुपये का मुआवजा 10 दिसंबर को जारी किया गया। चरखी दादरी, हिसार, भिवानी और सिरसा जैसे जिलों में सबसे ज्यादा किसान प्रभावित रहे। नूंह से कांग्रेस विधायक आफताब अहम के सवाल पर राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल ने यह आंकड़ा रखा।
आफताब अहमद ने कहा कि 5 लाख 29 हजार एकड़ से अधिक फसल में नुकसान की रिपोर्ट किसानों ने की लेकिन सरकार ने केवल 1 लाख 20 हजार एकड़ का ही मुआवजा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसान हितैषी होने का दम भर रही है लेकिन किसानों की अनदेखी हो रही है। गोयल ने कहा कि कांग्रेस ने दस वर्षों के राज में महज 1158 करोड़ का मुआवजा दिया था। वहीं भाजपा 11 वर्षों में 4771 करोड़ का मुआवजा दे चुकी है।
बीमा योजना के 116 करोड़ पेडिंग
डबवाली विधायक आदित्य देवीलाल के सवाल के जवाब में कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने सदन में रखी रिपोर्ट में माना कि बीते तीन वर्षों में बीमा कंपनियों के पास किसानों के 116 करोड़ 21 लाख रुपये से अधिक के क्लेम लंबित हैं। यानी हजारों किसान बीमा कराने के बावजूद भुगतान के इंतजार में हैं। उन्होंने बताया कि यह पैसा तकनीकी कारणों - एनईएफटी रिजेक्ट, खाते बंद, किसान की मृत्यु से लटका है। वहीं कुछ मामलों में विवादित फसल कटाई की वजह से भी मुआवजा नहीं दिया जा सका। भिवानी, चरखी दादरी, नूंह और सिरसा जिलों में सबसे ज्यादा पेंडिंग क्लेम हैं।
अब डिजी क्लेम मॉड्यूल किया लागू
कृषि मंत्री ने सफाई दी कि देरी रोकने के लिए डिजी क्लेम मॉड्यूल लागू किया गया है, जिससे क्लेम की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक हो सके। बैंक खातों की गड़बड़ियों के लिए सुधार मॉड्यूल शुरू किया गया और बीमा कंपनियों को दस्तावेज जल्द अपडेट करने के निर्देश दिए गए। इन प्रयासों से तीन वर्षों में 223 किसानों को 14.04 लाख रुपये का अटका भुगतान दिलाया गया।

