Haryana Property Tax Amendment: घर में PG, दुकान, क्लीनिक या ऑफिस चला तो बदल जाएगा प्रॉपर्टी टैक्स, 13 साल बाद व्यवस्था बदली
Haryana Property Tax Amendment: कमाई वाली संपत्तियों पर बढ़ सकता है कर भार, छोटे मकानों और समय पर टैक्स देने वालों को राहत, गुरुग्राम से पंचकूला तक एक ही सेक्टर के पड़ोसी मकानों का टैक्स भी अलग-अलग हो सकेगा
Haryana Property Tax Amendment: हरियाणा में अब प्रॉपर्टी टैक्स का सबसे बड़ा आधार मकान का आकार नहीं, बल्कि उसका इस्तेमाल होगा। सरकार ने नई अधिसूचना जारी कर 13 साल पुरानी व्यवस्था में व्यापक बदलाव कर दिए हैं। इसके साथ ही ‘एक जैसी संपत्ति, एक जैसा टैक्स' का पुराना फार्मूला लगभग खत्म हो गया है। अब एक ही कॉलोनी में बने दो समान आकार के मकानों का टैक्स भी अलग-अलग हो सकता है। यदि एक मकान केवल रहने के लिए इस्तेमाल हो रहा है और दूसरे में पीजी, कोचिंग सेंटर, क्लीनिक, बैंक, कार्यालय, होटल या अन्य व्यावसायिक गतिविधि चल रही है तो दोनों की कर देनदारी अलग होगी। नई व्यवस्था में संपत्ति का उपयोग, कलेक्टर रेट और कैपिटल वैल्यू मिलकर टैक्स तय करेंगे।
हर संपत्ति का अलग ‘टैक्स प्रोफाइल' बनेगा
नई नीति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सरकार ने पहली बार संपत्तियों का बेहद विस्तृत वर्गीकरण किया है। अब केवल आवासीय और व्यावसायिक की दो श्रेणियां नहीं रहेंगी। पीजी, हॉस्टल, होटल, रेस्तरां, निजी अस्पताल, बैंक, कोचिंग सेंटर, गोदाम, औद्योगिक इकाई, विवाह स्थल, मॉल, पेट्रोल पंप और मोबाइल टावर जैसी संपत्तियों के लिए अलग-अलग गुणांक तय किए गए हैं। यानी अब संपत्ति किस काम में आ रही है, उसी के अनुसार उसका टैक्स निकलेगा।
सबसे ज्यादा असर इन शहरों में दिखेगा
नई व्यवस्था का सबसे ज्यादा प्रभाव उन शहरों में देखने को मिलेगा जहां बड़ी संख्या में आवासीय भवनों का व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। गुरुग्राम और मानेसर में हजारों फ्लैट पीजी, कार्यालय और किराये के आवास के रूप में इस्तेमाल हो रहे हैं। फरीदाबाद में औद्योगिक इकाइयों और वेयरहाउस की संख्या अधिक है। पंचकूला में स्वतंत्र फ्लोर, क्लीनिक और किराये की कोठियां, जबकि करनाल, हिसार, अंबाला, रोहतक, पानीपत और सोनीपत में बाजारों के ऊपर बने मकान, गोदाम और मिश्रित उपयोग वाली इमारतें नई व्यवस्था से सीधे प्रभावित होंगी। ऐसे मामलों में पहले की तुलना में टैक्स की गणना अलग तरीके से होगी।
हर किसी की जेब पर एक जैसा असर नहीं
नई व्यवस्था को केवल टैक्स बढ़ाने या राहत देने वाली नीति नहीं कहा जा सकता। अधिसूचना के अनुसार जिन संपत्तियों से आय अर्जित की जा रही है या जिनका व्यावसायिक उपयोग हो रहा है, उनका कर भार बढ़ सकता है। वहीं छोटे आवासीय मकानों पर अचानक बोझ न पड़े, इसके लिए टैक्स वृद्धि को चरणबद्ध रखने का प्रावधान किया गया है। महिलाओं के नाम दर्ज संपत्तियों, दिव्यांगों, समय पर टैक्स जमा करने वालों तथा कुछ विशेष श्रेणियों के लिए रियायत भी दी गई है। यानी सरकार ने आय पैदा करने वाली संपत्तियों पर अपेक्षाकृत अधिक कर और सामान्य आवासीय संपत्तियों के लिए राहत का संतुलन बनाने की कोशिश की है।
गलत जानकारी छिपाना अब पड़ेगा भारी
नई व्यवस्था के साथ निगरानी भी सख्त कर दी गई है। यदि कोई संपत्ति मालिक भवन के वास्तविक उपयोग की जानकारी छिपाता है या गलत विवरण देकर कम टैक्स देने का प्रयास करता है तो उसे दोगुना जुर्माना, ब्याज और अन्य दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अब स्व-घोषणा के आधार पर टैक्स व्यवस्था चलेगी, लेकिन गलत घोषणा पर सख्ती भी उतनी ही होगी।
असली तस्वीर नए टैक्स बिल में दिखेगी
अधिसूचना से यह स्पष्ट है कि टैक्स का पूरा ढांचा बदल गया है, लेकिन किस संपत्ति पर वास्तविक कर कितना बढ़ेगा या घटेगा, इसकी तस्वीर नए आकलन और संशोधित टैक्स बिल जारी होने के बाद ही सामने आएगी। हालांकि इतना तय है कि अब गुरुग्राम के किराये वाले फ्लैट, पंचकूला की पीजी, करनाल की दुकान, हिसार के गोदाम या फरीदाबाद की औद्योगिक इकाई का टैक्स एक ही फार्मूले से नहीं निकलेगा। हर संपत्ति का मूल्यांकन उसके वास्तविक उपयोग के आधार पर होगा।
क्या बदलेगा आम लोगों के लिए
नई व्यवस्था के बाद हर संपत्ति मालिक को अपने भवन के वास्तविक उपयोग का सही विवरण देना होगा। जिन लोगों ने मकान का कुछ हिस्सा किराये, पीजी, क्लीनिक, दुकान या अन्य व्यवसाय के लिए इस्तेमाल किया है, उनके लिए कर गणना पहले जैसी नहीं रहेगी। वहीं केवल आवासीय उपयोग करने वाले और समय पर टैक्स जमा करने वाले संपत्ति मालिकों को अधिसूचना में दिए गए राहत प्रावधानों का लाभ मिल सकेगा। इस तरह सरकार ने पहली बार प्रॉपर्टी टैक्स को ‘संपत्ति के आकार' से आगे बढ़ाकर ‘संपत्ति के उपयोग' से सीधे जोड़ दिया है।
हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल का कहना है कि राज्य सरकार ने प्रॉपर्टी टैक्स व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और न्यायसंगत बनाने की दिशा में यह व्यापक सुधार किया है। नई प्रणाली का उद्देश्य ईमानदार करदाताओं को राहत देना और संपत्ति के वास्तविक उपयोग के आधार पर कर निर्धारण सुनिश्चित करना है। छोटे आवासीय संपत्ति मालिकों के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है, वहीं व्यावसायिक उपयोग वाली संपत्तियों के लिए स्पष्ट और तर्कसंगत व्यवस्था बनाई गई है। इससे कर प्रणाली में समानता आएगी, विवाद कम होंगे और शहरी निकायों को विकास कार्यों के लिए मजबूत राजस्व आधार भी मिलेगा।

