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Haryana News : नूंह में सीवर सफाई के दौरान दम घुटने से 2 कर्मचारियों की मौत, एक गंभीर; सुरक्षा उपकरणों के बिना उतरे थे नीचे

हादसे के बाद ठेकेदार फरार, पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर शुरू की जांच

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हरियाणा के नूंह जिले के फिरोजपुर झिरका में मंगलवार रात सीवर सफाई के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। यहां सीवर लाइन की सफाई करने उतरे तीन कर्मचारियों में से दो की जहरीली गैस के कारण दम घुटने से मौत हो गई। तीसरा कर्मचारी गंभीर रूप से घायल है, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद से इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल है।

सुरक्षा उपकरणों का अभाव बना मौत का कारण

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लोगों का आरोप है कि जन स्वास्थ्य विभाग और संबंधित ठेकेदार ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए कर्मचारियों को बिना किसी सुरक्षा किट, मास्क या वर्दी के सीवर के भीतर उतारा था। जहरीली गैस के प्रभाव से तीनों कर्मचारी अंदर ही बेहोश हो गए। जब तक उन्हें बाहर निकाला गया, तब तक दो की जान जा चुकी थी। हादसे के बाद ठेकेदार फरार हो गया है। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

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फरीदाबाद में भी 2025 में हुई थी सफाईकर्मी की मौत

नूंह के इस हादसे ने प्रदेश में सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में भी पिछले साल 20 मार्च 2025 की रात बल्लभगढ़ क्षेत्र में सीवर सफाई के दौरान एक निजी कंपनी के कर्मचारी इजमान अली की जहरीली गैस से मौत हो गई थी। उस समय भी यही लापरवाही सामने आई थी कि कर्मचारी बिना किसी सुरक्षा किट के मैनहोल में उतरा था।

हरियाणा में कहां-कहां हुए बड़े सीवर हादसे

प्रदेश के विभिन्न जिलों में पिछले कुछ समय में हुए दर्दनाक हादसों की सूची इस प्रकार है:

सोनीपत: अप्रैल 2025 में यहाँ दो मजदूरों की सीवर सफाई के दौरान दम घुटने से मौत हुई।

हांसी (हिसार): जनवरी 2026 में सेप्टिक टैंक की सफाई करते समय दो कर्मचारियों की जान चली गई।

गुरुग्राम: सेक्टर 10 में सीवर लाइन की मरम्मत के दौरान दो कर्मचारी जहरीली गैस की चपेट में आए और दम तोड़ दिया।

रोहतक: यहां भी पिछले वर्ष एक निजी कॉलोनी के सीवर टैंक की सफाई के दौरान एक कर्मचारी की मौत हुई थी।

कैथल: सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में सफाई के दौरान गैस रिसाव से हादसा हुआ था, जिसमें दो कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गए थे।

हरियाणा में मौतों का भयावह आंकड़ा

प्रदेश में पिछले 8 वर्षों में लगभग 125 लोग सीवर की जहरीली गैस की भेंट चढ़ चुके हैं। सरकार ने सीवर सफाई के लिए मशीनों का उपयोग अनिवार्य किया है, लेकिन धरातल पर आज भी ठेकेदार अपनी बचत के लिए मजदूरों को मौत के कुएं में उतार रहे हैं।

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