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Haryana Kisan ID : हरियाणा में नए पटवारियों की एंट्री के साथ बड़ा मिशन, किसान आईडी से जमीन रिकॉर्ड तक संभालेंगे मोर्चा

हर दिन 30 किसान आईडी बनाने का टारगेट, नए पटवारियों को मिला एग्रीस्टैक मिशन; गांव-गांव बनवाएंगे किसान आईडी, हर गांव में टीम और हर दिन का लक्ष्य तय

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सांकेतिक चित्र
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Haryana Kisan ID : हरियाणा में हाल ही में चयनित पटवारियों की भूमिका अब सिर्फ राजस्व रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहने वाली। राज्य सरकार ने उन्हें सीधे किसानों, जमीन रिकॉर्ड और डिजिटल प्रशासन से जोड़ते हुए बड़ा जिम्मा सौंप दिया है। नए आदेशों के तहत इन पटवारियों को एग्रीस्टैक (फार्मर रजिस्ट्री), किसान आईडी निर्माण, आधार सीडिंग, भूमि रिकॉर्ड मानकीकरण और भू-नक्शा अपडेट जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में लगाया जाएगा। इसके लिए सभी जिलों को विस्तृत निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

निर्देशों के अनुसार जिला प्रशासन गांव स्तर पर विशेष टीमें बनाएगा। इन टीमों में नव नियुक्त पटवारी, कृषि ऑपरेटर और संबंधित गांव का नंबरदार शामिल होगा। ग्राम सरपंच और ग्राम सचिव भी इस अभियान में सहयोग करेंगे। इन टीमों का मुख्य काम किसानों की फार्मर आईडी तैयार करना, लंबित मामलों का सत्यापन करना और भूमि मालिकों के आधार नंबर को राजस्व रिकॉर्ड से जोड़ना होगा।

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इसके लिए गांवों में कैंप आयोजित किए जाएंगे ताकि किसानों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि सौंपे गए कार्यों में लापरवाही या गैर-प्रदर्शन को गंभीरता से लिया जाएगा और नियमों के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। हरियाणा में राजस्व व्यवस्था को डिजिटल और तेज बनाने की दिशा में सरकार ने नए पटवारियों को फ्रंटलाइन पर उतार दिया है। आने वाले महीनों में इसका सीधा असर किसानों और जमीन रिकॉर्ड सेवाओं पर देखने को मिल सकता है।

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1.70 करोड़ रिकॉर्ड में अभी लंबा सफर बाकी

दस्तावेज के अनुसार प्रदेश में लगभग 1.70 करोड़ राजस्व रिकॉर्ड हैं, जिनमें से करीब 42 लाख रिकॉर्ड का आधार सीडिंग कार्य बैकएंड प्रक्रिया से पूरा हो चुका है। बाकी रिकॉर्ड और किसान आईडी तैयार करने का काम अब तेजी से पूरा करने की योजना बनाई गई है।

हर टीम को रोजाना का लक्ष्य

सरकार ने केवल जिम्मेदारी नहीं दी बल्कि लक्ष्य भी तय कर दिए हैं। प्रत्येक टीम को प्रतिदिन कम से कम 30 किसान आईडी तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है। साथ ही लंबित सत्यापन मामलों को भी निपटाना होगा। हर तहसील में गांववार रोस्टर तैयार किया जाएगा और काम सोमवार से शनिवार तक चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। प्रगति की निगरानी तहसीलदार, जिला राजस्व अधिकारी और राज्य स्तर की प्रोजेक्ट यूनिट करेगी। इसके लिए अलग डैशबोर्ड भी उपलब्ध कराया गया है।

सिर्फ किसान आईडी नहीं, रिकॉर्ड सुधार का भी बड़ा अभियान

सरकार ने निर्देशों में साफ किया है कि नए पटवारियों की भूमिका केवल एग्रीस्टैक तक सीमित नहीं होगी। उन्हें जमाबंदी में स्टे, लोन एंट्री और प्राइम खसरा नंबरों के मानकीकरण का काम भी करना होगा। हर तहसील में दो से चार टीमें बनाई जाएंगी जो राजस्व रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से व्यवस्थित करेंगी। इस प्रक्रिया को 30 जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

खाना काश्त सुधार और भू-नक्शा अपडेट भी एजेंडे में

निर्देशों के अनुसार ‘खाना काश्त’ प्रविष्टियों में सुधार के लिए अलग व्यवस्था बनाई गई है। इस कार्य में कार्यालय कानूनगो और तहसील स्तर के अधिकारी जिम्मेदार होंगे। यह प्रक्रिया दो महीने के भीतर पूरी करने को कहा गया है। इसके अलावा भू-नक्शा पोर्टल पर लंबित ततीमों को अपडेट करने का काम मौजूदा फील्ड पटवारियों को सौंपा गया है और इसे एक महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया है।

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