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Haryana Firefighters Strike : हरियाणा सरकार ने 12 मांगें मानीं, नियमितीकरण पर अड़े फायरकर्मी; हड़ताल के बीच 23 कर्मियों की सेवाएं खत्म

पालिका रोल के 13 और एचकेआरएन के 10 कर्मचारी शामिल; 6 अगस्त से ड्यूटी से गैरहाजिरी और हड़ताल में शामिल होने का हवाला

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Haryana Firefighters Strike :  हरियाणा में सफाई और फायर कर्मचारियों की हड़ताल के बीच सरकार ने 23 फायर कर्मचारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। इनमें पालिका रोल पर तैनात 13 और हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएन) के माध्यम से लगे 10 कर्मचारी शामिल हैं। अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा निदेशालय ने 3 सितंबर को जारी आदेशों में 6 अगस्त से बिना अनुमति ड्यूटी से गैरहाजिर रहने और हड़ताल में शामिल होने को कार्रवाई का आधार बताया है।

पालिका रोल के 13 कर्मचारियों की सेवाएं खत्म

सेवा समाप्त किए गए 13 पालिका रोल कर्मचारियों में सतीश कुमार और राजेश कुमार (दमकल केंद्र बहादुरगढ़), सत्यवान (नरवाना), नरेंद्र सिंह (धारूहेड़ा), सुरेश कुमार (आईएमटी बावल), राजेश कुमार (सिरसा), प्रदीप कुमार (हिसार), रणबीर (पानीपत), सोनू (रोहतक), कुलविंद्र सिंह (कुरुक्षेत्र), महावीर (करनाल), रिंकू कुमार (जगाधरी) और रणजीत (दमकल केंद्र सेक्टर-15, फरीदाबाद) शामिल हैं। सभी कर्मचारियों को 3 सितंबर को जारी अलग-अलग आदेशों के माध्यम से सेवा से हटाया गया है।

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एचकेआरएन के 10 कर्मचारी भी कार्रवाई की जद में

दूसरी कार्रवाई एचकेआरएन के माध्यम से दमकल केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों पर की गई है। इनमें बलविंद्र (उद्योग विहार, गुरुग्राम), अभिषेक और कमल कांबोज (यमुनानगर), सुरेंद्र (पिंजौर), दीपक (हांसी), नरेश कुमार और प्रवीण कुमार (करनाल), जोनी (कैथल), जितेंद्र (सेक्टर-29, गुरुग्राम) और गौरव ठाकरान (सेक्टर-37, गुरुग्राम) शामिल हैं।

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आदेश में लगाए गए ये आरोप

विभाग के आदेशों के अनुसार संबंधित कर्मचारी 6 अगस्त से लगातार ड्यूटी से अनुपस्थित हैं। उन पर गैरकानूनी तरीके से यूनियन गतिविधियों में शामिल होने, हड़ताल में भाग लेने, दूसरे कर्मचारियों को हड़ताल में शामिल होने के लिए उकसाने और विभागीय काम में बाधा डालने के आरोप लगाए गए हैं।

विभाग ने अग्निशमन सेवा को अत्यंत आवश्यक सेवा बताते हुए इस आचरण को गंभीर अनुशासनहीनता माना है। आदेशों में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा अधिनियम, 2022 की धारा 51 का भी हवाला दिया गया है। विभाग के अनुसार बिना सरकार की पूर्व अनुमति यूनियन की गतिविधियों में भाग लेना गैरकानूनी है। इसी आधार पर संबंधित कर्मचारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त की गई हैं।

नियमितीकरण पर अटका आंदोलन

सरकार के अनुसार कर्मचारियों की 13 मांगों में से 12 स्वीकार की जा चुकी हैं। सबसे बड़ा गतिरोध नियमितीकरण की मांग को लेकर है। सरकार का तर्क है कि नियमितीकरण में तकनीकी और कानूनी अड़चन है। इसके बदले कर्मचारियों को 60 साल की उम्र तक सेवा सुरक्षा देने और वेतन में बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया गया है।

हालांकि, कर्मचारी नियमितीकरण की मांग पर अड़े हुए हैं। इसी वजह से 6 अगस्त से शुरू हुआ आंदोलन जारी है। कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल को 6 सितंबर तक जारी रखने का ऐलान किया है।

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