Haryana Civic Elections: डेढ़ साल बाद भाजपा-कांग्रेस फिर आमने-सामने, निकाय चुनाव होंगे बड़ी परीक्षा
Haryana Civic Elections: नायब सरकार के सामने जीत कायम रखने की चुनौती, कांग्रेस को हासिल करना होगा ‘भरोसा’
Haryana Civic Elections: अक्तूबर-2024 के विधानसभा चुनावों के बाद अब एक बार फिर भाजपा व कांग्रेस आमने-सामने होंगे। तीन नगर निगमों सहित सात शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव सत्तारूढ़ भाजपा के साथ-साथ प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के लिए भी किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं हैं। भाजपा के सामने जहां अपनी जीत को कायम रखने का चैलेंज है वहीं कांग्रेस को लोगों को ‘भरोसा’ जीतने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी।
रोचक पहलू यह है कि जिन तीन नगर निगमों में चुनाव हो रहा है, उन पर 2020-21 के चुनावों में दो निगमों में मेयर पद पर विपक्ष का कब्जा था। सोनीपत में कांग्रेस टिकट पर निखिल मदान तथा अंबाला सिटी नगर निगम में मेयर पद पर पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा की पत्नी शक्ति रानी शर्मा मेयर बनी थीं। वहीं पंचकूला में भाजपा के कुलभूषण गोयल मेयर बने थे।
2024 के विधानसभा चुनावों के दौरान शक्ति रानी शर्मा ने कालका हलके से भाजपा टिकट पर चुनाव लड़ा और विधायक बनने में कामयाब रहीं। इसी तरह से कांग्रेस के मेयर निखिल मदान ने भी 2024 में सोनीपत से भाजपा टिकट पर विधानसभा का चुनाव जीता। इन दोनों ही निगमों में मेयर पद पर उपचुनाव हुए और दोनों सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की। चुनावों की घोषणा के साथ ही अब भाजपा व कांग्रेस में उम्मीदवारों के चयन को लेकर मंथन शुरू हो गया है।
कांग्रेस ने तो निकाय चुनावों के लिए पूर्व शिक्षा मंत्री व झज्जर विधायक गीता भुक्कल की अध्यक्षता में कमेटी का गठन भी कर दिया है। पार्टी प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह की ओर से बनाई गई यह चुनावी घोषणा-पत्र कमेटी में नूंह विधायक आफताब अहमद, रोहतक विधायक बीबी बतरा, एआईसीसी सदस्य जितेंद्र कुमार भारद्वाज, पूर्व विधायक जसबीर मल्लौर, मीडिया एवं कार्यालय प्रभारी संजीव भारद्वाज, तरुण चुघ, सतीश तेजली तथा जयवीर अंतिल को बतौर सदस्य शामिल किया है।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि इस समिति को स्थानीय निकाय चुनावों से संबंधित प्रमुख स्थानीय मुद्दों को ध्यान में रखते हुए शीघ्र ही चुनाव घोषणा पत्र तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि समिति को स्थानीय निवासियों से सक्रिय रूप से सुझाव और विचार प्राप्त करने के लिए भी कहा गया है, ताकि एक व्यापक और प्रभावी घोषणा पत्र तैयार किया जा सके, जो जनता की समस्याओं और आकांक्षाओं को सही रूप में प्रतिबिंबित करे।
सिम्बल पर छिड़ेगी चुनावी जंग
सत्तारूढ़ भाजपा निगमों के चुनाव शुरू से ही पार्टी सिम्बल पर लड़ती आई है। कांग्रेस ने भी नगर निगम में मेयर और पार्षद पद के चुनाव सिम्बल पर लड़ने का फैसला लिया है। प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह तथा पूर्व सीएम व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा पहले ही इसकी घोषणा कर चुके हैं। भाजपा रेवाड़ी नगर परिषद में अध्यक्ष व पार्षद पद के चुनावों पर भी अपने उम्मीदवार सिम्बल पर उतार सकती है। वहीं नगर पालिकाओं में भाजपा सिम्बल पर चुनाव लड़ने से दूरी बना सकती है।
नायब सरकार की होगी परीक्षा
निकायों के ये चुनाव प्रदेश की नायब सरकार के सामने परीक्षा भी होंगे। प्रदेश में नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य में भाजपा की लगातार तीसरी बार सरकार बनी। इस दौरान नायब सिंह सैनी बतौर वित्त मंत्री अपनी सरकार के दो बजट भी पेश कर चुके हैं। इस बार के बजट में भी शहरी मतदाताओं को रिझाने के लिए कई बड़ी घोषणाएं की गई हैं। माना जा रहा है कि निकाय के इन चुनावों में भाजपा ‘ट्रिपल इंजन’ की सरकार का नारा लेकर मैदान में उतरेगी। वहीं गुटबाजी व आपसी खींचतान से दो-चार हो रही कांग्रेस के सामने भी यह चुनाव बड़ी चुनौती हैं। 16 मार्च को राज्यसभा की दो सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस के पांच विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग तथा चार विधायकों के वोट रद्द होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल भी टूटा है। वहीं भाजपा वर्करों का मनोबल बढ़ा हुआ है।

