Haryana Bank Scam: 650 करोड़ घोटाले के बाद 5 साल के सभी सरकारी बैंक खातों की होगी जांच
हर विभाग से पांच साल का डीडीओ रिकॉर्ड तलब, ट्रांजेक्शन से लेकर 31 मार्च तक के बैलेंस का देना होगा पूरा हिसाब
करीब 650 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच के बीच हरियाणा सरकार ने सरकारी विभागों के बैंक खातों की राज्यव्यापी पड़ताल शुरू कर दी है। वित्त विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश जारी कर वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक संचालित सभी ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (डीडीओ) बैंक खातों का विस्तृत रिकॉर्ड तलब किया है। विभागों को प्रत्येक खाते में हुए लेन-देन, वर्षवार खर्च, 31 मार्च तक उपलब्ध शेष राशि, निष्क्रिय खातों और उनके क्लोजिंग बैलेंस की जानकारी निर्धारित प्रारूप में एक सप्ताह के भीतर हार्ड और सॉफ्ट कॉपी दोनों में उपलब्ध करानी होगी। सरकार का उद्देश्य पांच वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण कर सरकारी धन के उपयोग, बैंक खातों के संचालन और वित्तीय अनुशासन की व्यापक समीक्षा करना है।
आठ विभाग जांच के दायरे में, अब पूरे सिस्टम की होगी समीक्षा
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक से जुड़े कथित बैंक घोटाले में अब तक आठ सरकारी विभागों का नाम सामने आ चुका है। मामले की जांच में तीन आईएएस अधिकारियों सहित करीब एक दर्जन अधिकारी और कर्मचारी गिरफ्तार होकर न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। इसी बीच सरकार ने किसी एक विभाग तक जांच सीमित रखने के बजाय पूरे सरकारी तंत्र के बैंक खातों का रिकॉर्ड खंगालने का फैसला किया है।
पांच साल का पूरा वित्तीय रिकॉर्ड मांगा
वित्त विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को वर्ष 2021-22, 2022-23, 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के डीडीओ बैंक खातों का विस्तृत ब्यौरा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। सरकार इन आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन कर यह आकलन करेगी कि विभागों ने आवंटित धन का उपयोग किस प्रकार किया और विभिन्न खातों में कितनी राशि शेष रही।
हर खाते की ट्रांजेक्शन और बैलेंस की होगी जांच
विभागों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए 31 मार्च तक संचालित कुल डीडीओ बैंक खातों की संख्या, वर्षभर का कुल व्यय, 31 मार्च तक उपलब्ध शेष राशि, पूरे वर्ष निष्क्रिय रहे खातों की संख्या तथा उनमें मौजूद क्लोजिंग बैलेंस की जानकारी देनी होगी। सरकार विशेष रूप से उन खातों की भी पहचान करेगी, जिनसे पूरे वित्तीय वर्ष के दौरान एक भी भुगतान नहीं हुआ।
खर्च के आधार पर तैयार होगी विभागवार प्रोफाइल
वित्त विभाग ने डीडीओ खातों को खर्च के आधार पर तीन श्रेणियों में वर्गीकृत कर जानकारी मांगी है। इसमें 50 प्रतिशत से कम खर्च वाले खाते, 50 से 99 प्रतिशत तक खर्च वाले खाते तथा 100 प्रतिशत खर्च वाले खाते शामिल हैं। इससे यह स्पष्ट होगा कि किन विभागों ने आवंटित बजट का पूरा उपयोग किया और किन खातों में सरकारी धन लंबे समय तक निष्क्रिय पड़ा रहा।
निष्क्रिय खातों का अलग से बनेगा डेटाबेस
जिन खातों से पूरे वर्ष कोई भुगतान नहीं हुआ, उनके संबंध में विभाग, DDO का नाम एवं पद, बैंक का नाम, खाता संख्या तथा 31 मार्च तक का क्लोजिंग बैलेंस भी उपलब्ध कराना होगा। इन खातों का अलग से विश्लेषण किया जाएगा, ताकि लंबे समय से निष्क्रिय पड़े सरकारी खातों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।
एक सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट
प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), हरियाणा द्वारा मांगी गई जानकारी के आधार पर वित्त विभाग ने सभी विभागों को एक सप्ताह के भीतर निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। जानकारी हार्ड और सॉफ्ट कॉपी दोनों रूपों में उपलब्ध करानी होगी। रिपोर्ट वित्त विभाग के साथ-साथ ट्रेजरी एवं अकाउंट्स, इंस्टीट्यूशनल फाइनेंस एंड क्रेडिट कंट्रोल तथा प्रधान महालेखाकार कार्यालय को भी भेजी जाएगी।
सिर्फ आंकड़े नहीं, जवाबदेही तय करने की तैयारी
सरकारी सूत्रों के अनुसार यह कवायद केवल आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं है। पांच वर्षों के रिकॉर्ड के विश्लेषण से सरकार यह पता लगाएगी कि किन विभागों में बैंक खातों का संचालन तय वित्तीय मानकों के अनुरूप हुआ, कहां सरकारी धन लंबे समय तक निष्क्रिय पड़ा रहा और किन मामलों में वित्तीय निगरानी व्यवस्था को और सख्त बनाने की जरूरत है। बैंक घोटाले के बाद इसे सरकारी बैंक खातों की जवाबदेही और निगरानी प्रणाली मजबूत करने की दिशा में अब तक का सबसे व्यापक कदम माना जा रहा है।

