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Haryana: विधानसभा में स्कूल मर्जर पर बहस, सरकार बोली, संख्या बढ़ी तो फिर खुलेंगे स्कूल

Haryana School Education: सात वर्षों में कम विद्यार्थियों वाले 400 स्कूलों को पड़ोसी स्कूलों में मर्ज किया गया

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हरियाणा विधानसभा की फाइल फोटो। ट्रिब्यून
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Haryana School Education: हरियाणा में सरकारी स्कूलों में घटते और फिर बढ़ते दाखिलों की कहानी शुक्रवार को विधानसभा में सामने आई। शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने खुलासा किया कि पिछले सात वर्षों में कम विद्यार्थियों वाले 400 स्कूलों को पड़ोसी स्कूलों में मर्ज किया गया, लेकिन जहां बच्चों की संख्या दोबारा बढ़ी, वहां सरकार ने 137 स्कूल फिर से खोल दिए।

यह जानकारी इनेलो विधायक अर्जुन चौटाला के सवाल के जवाब में दी गई, जिसने शिक्षा व्यवस्था, ग्रामीण इलाकों में स्कूलों की पहुंच और सरकार की नीति - तीनों पर नई बहस छेड़ दी। शिक्षा मंत्री महिपाल सिंह ढांडा ने बताया कि वर्ष 2019 से अब तक यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से अपनाई गई। 2019 में 25 से कम विद्यार्थियों वाले 66 स्कूलों को एक किलोमीटर के दायरे में स्थित अन्य स्कूलों में समायोजित किया गया।

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उन्होंने बताया कि 2021 में नियमों में बदलाव कर मानक और सख्त किया गया। इस दौरान केवल 9 विद्यार्थियों वाले 46 स्कूलों का मर्जर किया गया। 2022 में यह प्रक्रिया सबसे व्यापक रही। इस साल 180 राजकीय प्राइमरी स्कूल, 103 राजकीय माध्यमिक विद्यालय, और 4 राजकीय उच्च विद्यालय मर्ज किए गए। 2023 में सिर्फ एक स्कूल का समायोजन हुआ। सरकार के अनुसार, इसका मकसद संसाधनों का बेहतर उपयोग और शिक्षकों की प्रभावी तैनाती है।

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छात्र लौटे तो स्कूल खुले

इस बहस का सबसे अहम पहलू यह रहा कि सरकार ने माना कि मर्ज किए गए स्कूल स्थायी रूप से बंद नहीं माने गए। शिक्षा मंत्री ने सदन को बताया कि 400 मर्ज स्कूलों में से 137 स्कूल ऐसे हैं, जहां छात्रों की संख्या दोबारा मानकों तक पहुंची, जिसके बाद उन्हें फिर से खोल दिया गया। मंत्री ने कहा कि विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि भविष्य में भी जहां दाखिले मानक पूरे होंगे, वहां स्कूल दोबारा शुरू किए जाएंगे।

बढ़े विद्यार्थियों का मांगा ब्यौरा

इनेलो विधायक अर्जुन चौटाला ने पूछा कि मर्जर के बाद संबंधित स्कूलों में दाखिलों में कितनी बढ़ोतरी हुई। उनका तर्क था कि स्कूल मर्ज होने से ग्रामीण बच्चों को दूर जाना पड़ता है, जिससे ड्रॉपआउट का खतरा बढ़ता है। वहीं सरकार का दावा है कि मर्जर से शिक्षा की गुणवत्ता सुधरी है और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हुआ है। शिक्षा मंत्री ने बढ़े हुए विद्यार्थियों की संख्या पर अलग से जानकारी देने की बात कही।

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