भगवंत मान की पत्नी गुरप्रीत कौर से जुड़े रिश्वत के आरोपों पर कोर्ट की अंतरिम रोक, रिटायर्ड जस्टिस रंजीत सिंह समेत तीन को नोटिस
मजीठिया और सुखपाल खैरा भी पक्षकार; कोर्ट ने कहा- असत्यापित मानहानिकारक सामग्री पोस्ट करने से प्रतिष्ठा को अपूरणीय नुकसान हो सकता है, अगली सुनवाई 30 सितंबर को
चंडीगढ़ की एक अदालत ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी गुरप्रीत कौर से जुड़े कथित रिश्वत मांगने के आरोपों को लेकर सोशल मीडिया या किसी अन्य माध्यम पर असत्यापित मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित, प्रसारित या साझा करने पर अंतरिम रोक लगा दी है।
अदालत ने रिटायर्ड जस्टिस रंजीत सिंह, शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा को यह निर्देश दिया है कि वे अगले आदेश तक ऐसी सामग्री प्रसारित न करें।
सिविल जज जूनियर डिवीजन, चंडीगढ़ डॉ. परीक्षित ने गुरप्रीत कौर की ओर से दायर हर्जाने और स्थायी निषेधाज्ञा की मांग वाली याचिका पर यह आदेश दिया। अदालत ने मुकदमे और अंतरिम रोक की अर्जी पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की है।
याचिका में गुरप्रीत कौर ने आरोप लगाया था कि रिटायर्ड जस्टिस रंजीत सिंह ने 20 अगस्त को दुष्कर्म के एक आरोपी से पांच करोड़ रुपये की कथित रिश्वत मांगने से संबंधित आरोप लगाए थे। याचिका के अनुसार, इन आरोपों को सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
याचिका में यह भी कहा गया कि बिक्रम सिंह मजीठिया ने चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनके खिलाफ अभियान चलाया और उससे संबंधित सामग्री एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम तथा यूट्यूब पर प्रसारित हुई। गुरप्रीत कौर ने आरोप लगाया कि उन्होंने प्रतिवादियों को कानूनी नोटिस भी भेजा, लेकिन कथित आपत्तिजनक सामग्री वापस नहीं ली गई।
‘असत्यापित सामग्री’ पर कोर्ट ने जताई चिंता
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता अपने पक्ष में मामला बनाने में सफल रही हैं। अदालत के अनुसार, याचिका में जिन पोस्ट, वीडियो और तस्वीरों का उल्लेख किया गया है, वे इस स्तर पर किसी ठोस प्रमाण से पुष्ट नहीं दिखाई देते।
अदालत ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्ति के प्रतिष्ठा के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। अदालत के मुताबिक, यदि बिना सत्यापन के कथित रिश्वत मांग से संबंधित सामग्री पोस्ट करने पर रोक नहीं लगाई गई तो याचिकाकर्ता को अपूरणीय क्षति हो सकती है।
पोस्ट हटाने के मामले में अभी नोटिस
अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल अंतरिम आदेश केवल ऐसी असत्यापित मानहानिकारक सामग्री को प्रकाशित या प्रसारित करने से रोकने तक सीमित है। सोशल मीडिया पर पहले से मौजूद पोस्ट, वीडियो और तस्वीरों को हटाने या डिलीट करने की मांग पर अदालत ने फिलहाल कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है।
अदालत ने कहा कि प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुनने के बाद इस संबंध में आगे निर्णय लिया जाएगा। अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।

