Gujarat Plane Crash: विमान हादसे की पहली बरसी, अहमदाबाद में आज भी परिवारों की आंखों में आंसू और दर्द
Gujarat Plane Crash: अहमदाबाद में पिछले साल 12 जून को हुए एअर इंडिया विमान हादसे को करीब एक साल बीत चुका है और इसमें जान गंवाने वाले 260 लोगों के परिवारों का दुख आज भी उनके आंसुओं में छलक जाता...
Gujarat Plane Crash: अहमदाबाद में पिछले साल 12 जून को हुए एअर इंडिया विमान हादसे को करीब एक साल बीत चुका है और इसमें जान गंवाने वाले 260 लोगों के परिवारों का दुख आज भी उनके आंसुओं में छलक जाता है।
एअर इंडिया की उड़ान संख्या एआई 171 की दुर्घटना में अपने प्रियजनों को गंवाने वाले कुछ लोग आज भी उड़ान भरने से डरते हैं, जबकि अन्य इस गहरे सदमे से उबरने के लिए काउंसलिंग का सहारा ले रहे हैं।
कई परिवारों और प्रत्यक्षदर्शियों के लिए इस त्रासदी का असर अब तक खत्म नहीं हुआ है। दीव निवासी रफीक अरब ने पिछले साल 12 जून को लंदन जाने वाले विमान के उड़ान भरते ही हुई दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना में अपने 25 वर्षीय बेटे फैजान को खो दिया था। तब से उन्होंने आज तक किसी विमान में कदम नहीं रखा है और वह हवाई यात्रा के गहरे डर के साए में जी रहे हैं।
सूरत निवासी मुक्ति वांसडिया के लिए इस त्रासदी ने उनके माता-पिता दिव्या (60) और अर्जुनसिंह (65) को छीन लिया। मुक्ति ने कहा, ''मेरे माता-पिता ही मेरी रोशनी थे।'' उनके माता-पिता अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर जा रहे थे और जीवन में पहली बार हवाई जहाज में बैठे थे। वे अपनी बड़ी बेटी से मिलने लंदन जा रहे थे। उन्होंने बताया, ''हवाई अड्डे पर, मैंने अपनी मां के पैर छुए लेकिन पिता के पैर छूना भूल गई। मैं वापस दौड़ी, उनके पैर छुए और उन्होंने मेरी पीठ थपथपाई। मैं उस अहसास को कभी नहीं भूल सकती। ऐसा लग रहा था मानो वह मुझे किसी युद्ध के लिए तैयार कर रहे हों।'' इस दुर्घटना ने मुक्ति को अवसाद में धकेल दिया।
बनासकांठा जिले के धनेरा गांव निवासी 50 वर्षीय सावधान चौधरी के बेटे कमलेश चौधरी और बहू धापुबेन भी इस हादसे में मारे गए। दोनों की उम्र 26 वर्ष थी और हादसे से ठीक छह महीने पहले उनकी शादी हुई थी। लंदन में बस चुके कमलेश अपनी पत्नी का वीजा मंजूर होने के बाद उन्हें साथ ले जाने के लिए भारत आए थे।
इस हादसे के प्रत्यक्षदर्शी 28 वर्षीय अजय परमार की जिंदगी भी इस एक साल में पूरी तरह बदल गई है। जब विमान मेघानीनगर हॉस्टल परिसर में क्रैश हुआ, तब वह घायल हो गए थे। दोपहर के भोजन के बाद अपने दोपहिया वाहन से घर लौट रहे अजय ने अचानक खुद को इस आपदा के बीच में घिरा पाया। उन्होंने कहा, ''मुझे अचानक एक जोरदार धमाके की आवाज सुनाई दी। इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाता, मेरे हाथ-पैर जल रहे थे।'' उस समय माली का काम करने वाले परमार ने अपना दोपहिया वाहन वहीं छोड़ा और घबराहट में भागे। उन्होंने कहा, ''उसके बाद मुझे कुछ याद नहीं है। आखिरी चीज जो मैंने देखी वह यह थी कि मेरी गाड़ी आग की लपटों में घिरी हुई थी।
