Green Tax Protest: ग्रीन टैक्स के विरोध में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल, पानीपत में थमा ट्रकों का पहिया
Green Tax Protest: दिल्ली-एनसीआर में बढ़े ग्रीन टैक्स के खिलाफ तीन दिवसीय आंदोलन; ट्रांसपोर्ट कारोबार और माल ढुलाई प्रभावित
Green Tax Protest: दिल्ली-एनसीआर में लगाए गए ग्रीन टैक्स के विरोध में ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस द्वारा घोषित तीन दिवसीय हड़ताल का असर अब पानीपत में भी दिखाई देने लगा है। हड़ताल के दूसरे दिन शुक्रवार को शहर में करीब 150 से 200 ट्रक खड़े रहे, जिससे दिल्ली जाने वाली गाड़ियों का संचालन पूरी तरह प्रभावित हो गया। इसका असर ट्रांसपोर्ट कारोबार और माल ढुलाई पर भी साफ देखने को मिला।
पानीपत ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रधान धर्मवीर मलिक ने कहा कि ट्रांसपोर्टरों पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदूषण कम करने के नाम पर पहले प्रति ट्रक तीन हजार रुपये ग्रीन टैक्स लिया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर पांच हजार रुपये तक कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले यूरो-4 वाहनों को बंद कर ट्रांसपोर्टरों को महंगी यूरो-6 गाड़ियां खरीदने के लिए मजबूर किया। उनके अनुसार एक यूरो-6 ट्रक पहले की तुलना में करीब 10 लाख रुपये तक महंगा पड़ता है, जबकि अब ग्रीन टैक्स का बोझ भी लगातार बढ़ाया जा रहा है।
धर्मवीर मलिक ने सवाल उठाते हुए कहा कि पहले ग्रीन टैक्स के रूप में वसूले गए करोड़ों रुपये का उपयोग प्रदूषण कम करने के लिए कहां किया गया, इसकी जानकारी सरकार को सार्वजनिक करनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि 21, 22 और 23 मई तक देशभर में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल जारी रहेगी। इन तीन दिनों में दिल्ली में प्रवेश करने वाले ट्रकों की संख्या लगभग शून्य रहने की संभावना है। उन्होंने सरकार से मांग की कि हड़ताल के दौरान और उसके बाद प्रदूषण स्तर के आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रदूषण बढ़ने का कारण केवल ट्रांसपोर्ट क्षेत्र नहीं है।
धर्मवीर मलिक के मुताबिक पानीपत से प्रतिदिन करीब 50 लाख रुपये का ट्रांसपोर्ट कारोबार होता है। रोजाना 150 से 200 गाड़ियां दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में प्रवेश करती हैं, लेकिन हड़ताल के चलते सभी वाहन खड़े हैं।
हड़ताल के कारण चालकों और वाहन मालिकों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चालक मुकेश ने बताया कि राजस्थान, पंजाब समेत कई राज्यों में जाने वाला माल रुका पड़ा है और गाड़ियां खड़ी होने से काम पूरी तरह ठप हो गया है।
वहीं चालक सुरेश ने कहा कि गाड़ियों की आमदनी बंद हो चुकी है जबकि डीजल, टायर और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्रांसपोर्ट भाड़े में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, जिससे कारोबार चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
ट्रांसपोर्टरों ने सरकार से ग्रीन टैक्स वापस लेने और डीजल की बढ़ती कीमतों से राहत देने की मांग की है।
