दयाल सिंह इवनिंग कॉलेज का नाम बदलने को गवर्निंग बॉडी की मंजूरी
गेंद दिल्ली कुलपति के पाले में, कर्मचारी खटखटाएंगे अदालत का दरवाजा
Dayal Singh Evening College राजधानी के दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध दयाल सिंह इवनिंग कॉलेज का नाम बदलने के प्रस्ताव को शनिवार को कॉलेज की गवर्निंग बॉडी ने मंजूरी दे दी। इस फैसले के बाद विवाद और तेज हो गया है। गवर्निंग बॉडी ने कॉलेज के लिए दो नए नाम -बंदा सिंह बहादुर कॉलेज और मजीठिया कॉलेज - सुझाए हैं।
बताया गया है कि कर्मचारियों और शिक्षक प्रतिनिधियों ने नाम परिवर्तन का विरोध करते हुए यथास्थिति बनाए रखने की मांग की थी। उनका कहना है कि महान परोपकारी सरदार दयाल सिंह मजीठिया की विरासत को संरक्षित रखा जाना चाहिए। हालांकि, गवर्निंग बाॅडी ने विरोध दर्ज कराने वाले असहमति पत्र को रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया।
गवर्निंग बाॅडी की बैठक डीएस चौहान की अध्यक्षता में हुई। इसमें 5 दिसंबर, 2025 को कॉलेज का नाम बदलने के लिए आयोजित बैठक में हुई चर्चा की पुष्टि की गयी। सूत्रों ने बताया कि कॉलेज के शिक्षक प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत असहमति पत्र, जिसमें वे यथास्थिति बनाए रखने की मांग कर रहे थे, को बैठक के दौरान दो घंटे तक बार-बार अनुरोध करने के बावजूद रिकॉर्ड में नहीं लिया गया।
चौहान ने कहा कि अंतिम निर्णय नियमानुसार होगा। अध्यक्ष डी.एस. चौहान का कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है।
अब गेंद दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश सिंह के पाले में है। वे दोनों नए नामों में से किसी एक को मंजूरी दे सकते हैं या यथास्थिति बनाए रखते हुए कॉलेज को उसके वर्तमान नाम से ही चलने दे सकते हैं।
नाम बदलने की प्रक्रिया गैरकानूनी : मिथिलेश सिंह
कॉलेज स्टाफ काउंसिल के अध्यक्ष मिथिलेश सिंह ने आरोप लगाया कि नाम बदलने की प्रक्रिया गैरकानूनी है। दयाल सिंह कॉलेज ट्रस्ट और दिल्ली विश्वविद्यालय के बीच संस्थान की भूमि को लेकर हुए समझौते के तहत कॉलेज का नाम संरक्षित है और नाम में कोई भी बदलाव गैरकानूनी है। नाम बदलने से न सिर्फ दयाल सिंह जी की विरासत को ठेस पहुंचेगी, बल्कि कॉलेज की जमीन का भी हनन होगा। इसलिए हम इस कदम के खिलाफ अदालत जा सकते हैं।
स्टाफ काउंसिल का आरोप है कि नाम बदलने का प्रस्ताव परिषद की पूर्व सहमति के बिना पारित किया गया, जबकि परिषद पहले ही इसका विरोध कर चुकी है।
