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पिहोवा में चार दिवसीय दिव्य गीता सत्संग का शुभारंभ, स्वामी ज्ञानानंद बोले- गीता जीवन की हर समस्या का समाधान

महामंडलेश्वर गीता मनीषी ने अर्जुन और श्रीकृष्ण के संवाद के माध्यम से धर्म, नैतिकता और अध्यात्म का संदेश दिया; खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर समेत अनेक गणमान्य रहे मौजूद

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पिहोवा की नई अनाज मंडी में शुक्रवार से चार दिवसीय दिव्य गीता सत्संग का शुभारंभ हुआ। प्रथम दिवस पर महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने अपने प्रवचनों में श्रद्धालुओं को श्रीमद्भगवद्गीता के आध्यात्मिक और व्यावहारिक संदेश से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की सर्वोत्तम कला है और आज भी प्रत्येक व्यक्ति की मानसिक, सामाजिक एवं नैतिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करती है।

स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में जब अर्जुन मोह और विषाद से व्याकुल होकर अपने कर्तव्य से विमुख होने लगे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें गीता का दिव्य उपदेश दिया। उन्होंने कहा कि अर्जुन का सबसे बड़ा संघर्ष बाहरी नहीं, बल्कि अपने मन के साथ था। आज भी मनुष्य के भीतर चलने वाले इसी मानसिक द्वंद्व का समाधान गीता में निहित है।

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उन्होंने कहा कि अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण की नारायणी सेना के बजाय स्वयं भगवान को चुना, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि सबसे बड़ा बल ईश्वर का सान्निध्य है। मनुष्य का सबसे स्थायी और विश्वसनीय साथी धन नहीं, बल्कि धर्म है। धर्म सुरक्षित रहेगा तो अर्थ, काम और मोक्ष भी सार्थक होंगे।

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स्वामी जी ने दुर्योधन और अर्जुन का उदाहरण देते हुए कहा कि दुर्योधन भौतिकवाद का प्रतीक था, जबकि अर्जुन अध्यात्म का प्रतिनिधि। उन्होंने भक्त प्रह्लाद, हिरण्यकशिपु और शबरी के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि अंततः विजय सत्य, श्रद्धा और धर्म की ही होती है।

उन्होंने कहा कि आज छोटी-छोटी आयु के बच्चे भी तनाव, अवसाद और मानसिक अशांति का सामना कर रहे हैं, जिसका प्रमुख कारण जीवन-मूल्यों से दूरी है। यदि युवा गीता के आदर्शों को अपनाएं तो समाज में नैतिकता, पारिवारिक संस्कार और मानवीय संवेदनाएं मजबूत होंगी। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि गीता को केवल पूजें नहीं, बल्कि पढ़ें, समझें और अपने जीवन में उतारें।

प्रवचनों के बाद हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर ने कहा कि उन्हें जब भी स्वामी ज्ञानानंद जी का सान्निध्य मिला है, आत्मिक शांति का अनुभव हुआ है। उन्होंने भी श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष आशीष चक्रपाणि, समाजसेवी उमेश गोयल, इंदर सिंगला और अनाज मंडी प्रधान नवीन गर्ग ने दीप प्रज्वलित कर किया। गीता पूजन में 48 कोस परिक्रमा अध्यक्ष रविंद्र सागवान, एडवोकेट शिव दर्शन मुरार, नगर पालिका उपाध्यक्ष दर्शना ढींगरा, तरसेम गर्ग और जगदीश गौड़ ने भाग लिया। आढ़ती एसोसिएशन पिहोवा ने गीता आरती की, जबकि प्रसाद सेवा श्री अमरनाथ सेवा मंडल द्वारा दी गई।

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