Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
Add Tribune As Your Trusted Source
search-icon-img
Advertisement

प. बंगाल विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी का शव TMC कार्यालय में फंदे से लटका मिला, सुसाइड नोट बरामद

रामपुरहाट स्थित पार्टी कार्यालय से कथित सुसाइड नोट भी बरामद, शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस मौत के कारणों की जांच में जुटी

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
featured-img featured-img
आशीष बनर्जी की फाइल फोटो।
Advertisement

पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी का शव बीरभूम जिले में तृणमूल कांग्रेस के कार्यालय में रविवार सुबह फंदे से लटका मिला। पुलिस सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि रामपुरहाट के हट्टाला पाड़ा इलाके में बनर्जी के आवास के पास स्थित पार्टी कार्यालय से एक कथित 'सुसाइड नोट' भी बरामद हुआ है।

बनर्जी का कथित 'सुसाइड नोट' सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ जिसमें लिखा है कि उनकी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है और उन्होंने इसमें राजनीति में आने पर अफसोस भी जताया। हालांकि, 'पीटीआई-भाषा' इस पत्र की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सकी है।

Advertisement

पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया। सूत्रों ने बताया कि अभी यह पता नहीं चल पाया है कि बनर्जी की मौत किन परिस्थितियों में हुई और पुलिस कथित 'सुसाइड नोट' में लिखी बातों एवं घटना से जुड़ी अन्य परिस्थितियों की जांच कर रही है।

Advertisement

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आशीष बनर्जी ने 2001 से 2026 तक राज्य विधानसभा में रामपुरहाट निर्वाचन क्षेत्र का लगातार प्रतिनिधित्व किया था। वह विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पूर्ववर्ती सरकार में स्कूली शिक्षा एवं कृषि समेत विभिन्न विभागों के मंत्री भी रहे।

एक पृष्ठ के कथित 'सुसाइड नोट' के अनुसार, आशीष बनर्जी ने दावा किया कि वह कभी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहे और उन्होंने किसी काम के बदले कभी पैसे नहीं लिए। उन्होंने कथित रूप से यह भी लिखा कि वह पार्टी के भीतर होने वाले ''गलत कार्यों'' को हमेशा स्वीकार नहीं कर पाते थे लेकिन उनका विरोध भी नहीं कर सके।

कथित 'सुसाइड नोट' में तारापीठ-रामपुरहाट विकास प्राधिकरण (टीआरडीए) का भी उल्लेख किया गया है। आशीष बनर्जी ने कथित सुसाइड नोट में दावा किया कि प्राधिकरण की निविदाओं से जुड़े फैसलों, चेक जारी करने, योजनाओं को मंजूरी देने या अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।

कथित सुसाइड नोट के अनुसार, उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें 'बदनाम' और अपमानित करने की कोशिश की गई तथा उन्हें लगता है कि राजनीति में आना उनकी भूल थी। छात्र जीवन से ही राजनीति से जुड़े रहे आशीष बनर्जी ने शिक्षक के रूप में भी काम किया था।

उन्होंने कथित सुसाइड नोट में अपने परिवार के सदस्यों को राजनीति में नहीं आने की सलाह दी और अपने विद्यार्थियों से मिले स्नेह को याद किया। उन्होंने 2026 का विधानसभा चुनाव रामपुरहाट सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ध्रुव साहा से 24,000 से अधिक मतों के अंतर से हार गए थे।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि चुनाव में हार के बाद बनर्जी राजनीति में खास सक्रिय नहीं थे। आशीष बनर्जी अपने राजनीतिक जीवन के दौरान बीरभूम में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम के केंद्र में भी रहे।

तृणमूल कांग्रेस के नेता अनुब्रत मंडल के पार्टी का जिलाध्यक्ष रहने के दौरान वह जिले में पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन के बाद इस वर्ष विधानसभा चुनाव में उसकी हार हुई और भाजपा ने राज्य में सरकार बनाई।

राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के कई पूर्व नेताओं और विधायकों को भ्रष्टाचार से संबंधित जांच और गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा है।

पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या आशीष बनर्जी ने आत्महत्या की और यदि ऐसा है तो उन्हें किस वजह से यह कदम उठाना पड़ा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कथित 'सुसाइड नोट' की सामग्री से उनकी मौत से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में और जानकारी मिलने की संभावना है।

Advertisement
×