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फिल्म 'घूसखोर पंडत' की टीम के खिलाफ FIR दर्ज, मायावती ने भी की ब्राह्मण समाज के अपमान की निंदा

Ghooskhor Pandat Row: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली पुलिस ने फिल्म ''घूसखोर पंडत'' के निदेशक और उनकी टीम के खिलाफ एक जाति विशेष को अपमानित करने और वैमनस्यता फैलाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है। हजरतगंज...

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मनोज वाजपेयी की फाइल फोटो। स्रोत एक्स अकाउंट @BajpayeeManoj
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Ghooskhor Pandat Row: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली पुलिस ने फिल्म ''घूसखोर पंडत'' के निदेशक और उनकी टीम के खिलाफ एक जाति विशेष को अपमानित करने और वैमनस्यता फैलाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है।

हजरतगंज कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) विक्रम सिंह ने बृहस्पतिवार को खुद यह प्राथमिकी दर्ज कराई। विक्रम सिंह ने शुक्रवार को 'पीटीआई-भाषा' से बातचीत में दावा किया कि यह फ़िल्म समाज में वैमनस्यता बढ़ाने और एक जाति विशेष को अपमानित करने का कारण बन रही है, इसलिए प्राथमिकी दर्ज करानी पड़ी।

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पुलिस के मुताबिक, फिल्म का नाम और इसकी कहानी एक खास जाति और समुदाय, खासकर ब्राह्मण समाज को गलत तरीके से दिखाती है। इससे लोगों में नाराजगी फैल सकती है और कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा है।

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यह प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 (धर्म, जाति और भाषा के आधार पर वैमनस्यता को बढ़ावा देना), 299 (जानबूझकर द्वेषपूर्ण तरीके से किसी वर्ग की भावनाओं को आहत करना), 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान), 353 (सार्वजनिक उपद्रव से संबंधित) और सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम की धारा 66 के तहत दर्ज की गई है।

यह प्राथमिकी 'घूसखोर पंडत' फ़िल्म के निदेशक एवं उनकी टीम के खिलाफ दर्ज की गई है। एसएचओ ने दर्ज कराई गई अपनी प्राथमिकी में कहा है कि ओटीटी मंच नेटफ्लिक्स पर एक फिल्म 'घूसखोर पंडत' उसके निदेशक एवं उनकी टीम द्वारा रिलीज की जा रही है।

उन्होंने शिकायत की है कि इस फिल्म का नाम एक विशेष जाति को चिह्नित कर उसे अपमानित करता है जिससे उस जाति विशेष में काफी रोष व्याप्त है। प्राथमिकी के अनुसार, कई सामाजिक संगठन एवं संस्थाओं की उक्त फिल्म को लेकर उग्र प्रदर्शन करने की तैयारी भी है। निदेशक द्वारा प्रसारित की गई इस फिल्म से समाज में सौहार्द एवं शांति बिगड़ने एवं समुदायों के बीच वैमनस्यता फैलने की आशंका है।

मायावती ने ब्राह्मण समाज के अपमान की निंदा की, फिल्म पर सरकार से प्रतिबंध की मांग

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने फिल्म 'घूसखोर पंडत' में ब्राह्मण समाज के कथित अपमान की निंदा की है और मांग की है कि इस जातिसूचक फिल्म पर केंद्र सरकार को तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहिए।

बसपा प्रमुख ने अपने आधिकारिक 'एक्स' खाते पर एक पोस्ट में लिखा, ''यह बड़े दुख व चिंता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले उत्तर प्रदेन में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी 'पंडत' को घूसखोर आदि बताकर पूरे देश में इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है।'' उन्होंने पोस्ट में कहा, ''इससे समूचे ब्राह्मण समाज में इस समय जबरदस्त रोष व्याप्त है, इसकी हमारी पार्टी भी कड़े शब्दों में निंदा करती है।''

मायावती ने कहा, ''ऐसी इस जातिसूचक फिल्म 'घूसखोर पंडत' पर केंद्र सरकार को तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहिए, बीएसपी की यह मांग है। साथ ही, इसको लेकर लखनऊ पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज करना उचित कदम है।''

'घूसखोर पंडत' काल्पनिक फिल्म है, इसका किसी जाति या समुदाय से कोई संबंध नहीं : नीरज पांडे

फिल्म निर्माता नीरज पांडे ने शुक्रवार को कहा कि 'घूसखोर पंडत' की कहानी पूरी तरह काल्पनिक है और इसका किसी भी जाति या समुदाय से कोई संबंध नहीं है। 'नेटफ्लिक्स' की इस फिल्म को एक दिन पहले अपने नाम को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा जिसके बाद पांडे का यह बयान सामने आया है।

सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में पांडे ने स्वीकार किया कि फिल्म के शीर्षक से दर्शकों के एक वर्ग की भावनाएं ''आहत'' हुई हैं और उन्होंने कहा कि फिलहाल फिल्म से जुड़ी सभी प्रचार सामग्री हटा ली जाएगी। इस सप्ताह की शुरुआत में फिल्म की घोषणा के बाद इसके नाम को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। कई उपयोगकर्ताओं ने इसे असंवेदनशील और अपमानजनक बताया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बृहस्पतिवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी किया। यह नोटिस एक शिकायत के बाद दिया गया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ओटीटी मंच पर रिलीज होने वाली आगामी फिल्म का नाम ''नकारात्मक रूढ़ियों को बढ़ावा देता है'' और ''एक मान्यता प्राप्त सामाजिक समूह को बदनाम करता है।''

पांडे ने कहा कि यह फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और ''पंडत'' शब्द का उपयोग केवल एक काल्पनिक पात्र के बोलचाल वाले नाम के तौर पर किया गया है। उन्होंने कहा, ''इस फिल्म की कहानी एक व्यक्ति के कृत्यों और उसकी पसंद/नापसंद पर केंद्रित है और यह किसी भी जाति धर्म या समुदाय को निशाना नहीं बनाती है। एक फिल्म निर्माता के रूप में मैं अपने काम को जिम्मेदारी के साथ करता हूं ताकि कहानियां विचारपूर्ण और सम्मानजनक हों।''

इस फिल्म में अभिनेता मनोज बाजपेयी मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। यह आगामी क्राइम थ्रिलर अजय दीक्षित उर्फ पंडत की कहानी है, जो एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी है। एक रात उसकी योजनाएं तब बिगड़ जाती हैं जब वह खुद को दिल्ली के बीचों-बीच एक वैश्विक साजिश के बीच फंसा हुआ पाता है। फिल्म की घोषणा मंगलवार को नेटफ्लिक्स के एक कार्यक्रम में की गई थी। इसका निर्देशन रितेश शाह ने किया है, जिन्होंने पांडे के साथ मिलकर इसकी कहानी भी लिखी है। इसे पांडे ने अपने बैनर 'फ्राइडे फिल्मवर्क्स' के तहत प्रोड्यूस किया है।

''ए वेडनेसडे'', ''स्पेशल 26'' और ''बेबी'' जैसी चर्चित फिल्मों के लिए मशहूर पांडे ने कहा कि ''घूसखोर पंडत'' को पूरी ईमानदारी से केवल दर्शकों के मनोरंजन के उद्देश्य से बनाया गया है। उन्होंने कहा, ''हम समझते हैं कि फिल्म के शीर्षक से कुछ दर्शकों को ठेस पहुंची है और हम उनकी भावनाओं को समझते हैं। इन चिंताओं को देखते हुए हमने फिलहाल सभी प्रचार सामग्री हटाने का निर्णय लिया है, क्योंकि हमारा मानना है कि फिल्म को पूरी तरह देखने और कहानी के संदर्भ को समझने के बाद ही उसका मूल्यांकन होना चाहिए, न कि अधूरी झलकियों के आधार पर। मैं जल्द इसे दर्शकों के साथ साझा करने के लिए उत्सुक हूं।''

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