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नेपाल बाढ़ पर फर्जी तस्वीरों और AI वीडियो की भरमार, सरकार ने उठाया बड़ा कदम; 72 यूजर्स पर कार्रवाई

नेपाल में बाढ़ के बाद एआई से तैयार फर्जी तस्वीरों और वीडियो की भरमार

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Nepal Flash Flood : नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद देश राहत एवं बचाव अभियान के साथ-साथ गलत सूचनाओं की बाढ़ से भी जूझ रहा है। सोशल मीडिया पर फर्जी और कृत्रिम मेधा (एआई) से तैयार तस्वीरों एवं वीडियो की भरमार के बीच सरकार ने पिछले कुछ दिनों में 72 सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को आपत्तिजनक सामग्री हटाने का निर्देश दिया है।

'द काठमांडू पोस्ट' की सोमवार की खबर के अनुसार, देश के मीडिया नियामक 'नेपाल प्रेस काउंसिल' ने ''भोटेकोशी घटना पर विशेष शिकायतें'' नाम से एक पोर्टल शुरू किया है, जिसके जरिए आम लोग आपदा से संबंधित गलत सूचना और आपत्तिजनक दृश्य सामग्री की शिकायत कर सकते हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब सोशल मीडिया मंचों पर हिमालयी देश में अचानक आई बाढ़ से हुई तबाही दिखाने का दावा करने वाले नाटकीय वीडियो और तस्वीरें बड़ी संख्या में प्रसारित हो रहे हैं।

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खबर के अनुसार, इनमें से कुछ फुटेज वास्तविक हैं, लेकिन तथ्य-जांचकर्ताओं ने पाया है कि व्यापक रूप से प्रसारित कई वीडियो और तस्वीरें दूसरे देशों में हुई आपदाओं की हैं, दोबारा प्रसारित की गई हैं या कृत्रिम मेधा की मदद से तैयार की गई हैं अथवा उनमें बदलाव किया गया है। भ्रामक सामग्री के तेजी से प्रसार ने सूचना तंत्र को और जटिल बना दिया है क्योंकि कई परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश में परेशान हैं और अधिकारी आपदा से हुए नुकसान का पूरा आकलन करने में जुटे हैं। सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने और सामग्री को वायरल करने की कोशिश में यह त्रासदी कमाई का जरिया भी बन गई है। इससे अधिकारियों, पत्रकारों और तथ्य-जांचकर्ताओं की चिंता बढ़ गई है।

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नेपाल प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष उमेश श्रेष्ठ के अनुसार, 72 सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को आपत्तिजनक सामग्री हटाने का निर्देश दिया गया है। इनमें से अधिकतर ने अपने निजी खातों के जरिए सामग्री पोस्ट की थी। श्रेष्ठ ने कहा कि शनिवार शाम पांच बजे तक काउंसिल के विशेष पोर्टल पर 101 शिकायतें मिली थीं, जिनमें भयावह दृश्य पोस्ट करने वाले 67 निजी खातों के खिलाफ शिकायतें शामिल थीं।

उन्होंने कहा, ''इसी तरह कुछ ऑनलाइन समाचार पोर्टलों और उनके सोशल मीडिया पृष्ठों के खिलाफ भी शिकायतें दर्ज की गई हैं।'' उन्होंने कहा कि मुख्यधारा के मीडिया संगठनों ने बड़े पैमाने पर भ्रामक सूचनाएं और अत्यधिक भयावह दृश्य प्रकाशित करने से परहेज किया है। श्रेष्ठ ने कहा, ''यह एक सकारात्मक बात है।'' सोशल मीडिया पर आए एक वीडियो में कथित तौर पर गृह मंत्री सुदान गुरूंग को आपदा स्थल पर एक सुरंग के अंदर बचाव अभियान में मदद करते हुए दिखाया गया था। हालांकि, पड़ताल में पता चला कि यह वीडियो भारत के उत्तराखंड में सुरंग बचाव अभियान का है और इसे मूल रूप से 14 अगस्त को अग्निशमन सेवा उत्तराखंड पुलिस ने पोस्ट किया था।

गत 27 अगस्त को 'एक्स' पर पोस्ट किए गए एक अन्य वीडियो में कथित तौर पर भयंकर बाढ़ दिखाई गई थी और इसे 70 लाख से अधिक बार देखा गया। एआई का पता लगाने वाले उपकरण 'हाइव मॉडरेशन' ने इसके 97.2 प्रतिशत संभावना के साथ एआई से तैयार होने का आकलन किया। 'एक्स' के कम्युनिटी नोट्स ने भी इसे फर्जी बताया। नेपाल-तिब्बत बाढ़ के दौरान एक पुल के ढहने का दावा करने वाले एक अन्य वीडियो को भी पूरी तरह एआई से तैयार पाया गया।

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