अब घर और मॉल में EV चार्जिंग की चिंता खत्म, हरियाणा ने बदला बिल्डिंग कोड, नई इमारतों में चार्जिंग व्यवस्था होगी अनिवार्य
Haryana Building Code: पार्किंग के साथ मिलेगी चार्जिंग की तैयारी, अलग से एफएआर नहीं लगेगा, पुराने भवनों में भी लोगों को अपने स्लॉट पर चार्जर लगाने की राहत
Haryana Building Code: हरियाणा में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार ने बड़ा और सीधे आम लोगों को प्रभावित करने वाला फैसला लिया है। राज्य सरकार ने हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 में बदलाव करते हुए नई और रिनोवेट होने वाली इमारतों में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को अनिवार्य कर दिया है।
इसका सबसे बड़ा असर उन परिवारों, सोसायटी निवासियों और लोगों पर पड़ेगा जो आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक कार खरीदने की योजना बना रहे हैं। अब तक लोगों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि ईवी खरीदने के बाद चार्जिंग कहां होगी। सोसायटियों में अलग अनुमति, वायरिंग और जगह को लेकर विवाद होते थे। नए बदलाव के बाद यह व्यवस्था पहले से ही भवन डिजाइन का हिस्सा बनेगी।
क्या बदला है बिल्डिंग कोड में
सरकार ने बिल्डिंग कोड के अध्याय-6 में संशोधन करते हुए इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को शामिल किया है। सबसे अहम फैसला यह है कि चार्जिंग से जुड़ा निर्माण एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) से मुक्त रहेगा। यानी बिल्डर या डेवलपर को इस व्यवस्था के कारण अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र का नुकसान नहीं होगा।
नए नियमों के अनुसार, गैर-आवासीय भवन जैसे मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, होटल और ऑफिस स्पेस में यदि 10 या उससे अधिक कार पार्किंग हैं, तो हर 3 पार्किंग स्लॉट पर कम से कम 1 ईवी चार्जिंग स्पॉट बनाना होगा। साथ ही पूरी पार्किंग को भविष्य के लिए 100 प्रतिशत ईवी रेडी बनाया जाएगा यानी पहले से ही वायरिंग और कंड्युट की व्यवस्था रखनी होगी। आवासीय परियोजनाओं जैसे ग्रुप हाउसिंग, को-ऑपरेटिव सोसायटी और आरडब्ल्यूए संचालित कॉलोनियों में 10 या उससे अधिक पार्किंग होने पर हर 5 पार्किंग स्लॉट पर कम से कम 1 चार्जिंग स्पॉट अनिवार्य होगा। यहां भी नई और रिनोवेट इमारतों को 100 प्रतिशत ईवी रेडी बनाना होगा।
आम लोगों को क्या फायदा मिलेगा
इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ मध्यम वर्ग और शहरी परिवारों को मिलेगा। पहला, भविष्य में ईवी खरीदने वाले लोगों को अलग से भारी खर्च करके चार्जिंग लाइन और इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं बनवाना पड़ेगा। दूसरा, सोसायटी और अपार्टमेंट में चार्जिंग को लेकर विवाद कम होंगे क्योंकि बिल्डिंग मंजूरी के समय ही इसकी योजना तय होगी। तीसरा, चार्जिंग सुविधा उपलब्ध होने से इलेक्ट्रिक वाहन अपनाना आसान होगा, जिससे पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घट सकती है।
पुराने फ्लैट और सोसायटी वालों को भी राहत
सरकार ने सिर्फ नई इमारतों तक बदलाव सीमित नहीं रखा है। आदेश के अनुसार यदि किसी मौजूदा भवन में कोई व्यक्ति अपने आवंटित पार्किंग स्लॉट पर ईवी चार्जिंग सुविधा लगाना चाहता है तो उसे अनुमति दी जा सकती है। हालांकि इसके लिए बिजली और अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा और संबंधित विभागों से प्रमाणन लेना होगा।
सुरक्षा पर रहेगा विशेष जोर
सरकार ने साफ किया है कि चार्जिंग स्पॉट बेसमेंट या स्टिल्ट फ्लोर में भी बनाए जा सकेंगे, लेकिन इसके लिए फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी मानकों का पालन अनिवार्य होगा। इसके अलावा ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट लेने के समय यह भी बताना होगा कि पार्किंग में कितने चार्जिंग स्लॉट उपलब्ध कराए गए हैं। यह बदलाव केवल बिल्डिंग नियमों का तकनीकी संशोधन नहीं, बल्कि हरियाणा के शहरों को आने वाले इलेक्ट्रिक दौर के लिए तैयार करने की शुरुआत माना जा रहा है। आने वाले समय में घर खरीदने वालों के लिए ‘चार्जिंग सुविधा है या नहीं’ उतना ही बड़ा सवाल हो सकता है जितना आज पार्किंग या बिजली बैकअप।

