Epstein Files Dispute : राहुल गांधी का PM मोदी पर बड़ा आरोप, कहा- दबाव में हुआ भारत-अमेरिका व्यापार समझौता
मोदी ने दबाव में आकर भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को मंजूरी दी : राहुल गांधी
Epstein Files Dispute : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि एप्स्टीन फाइल्स जारी करने की धमकी और उद्योगपति गौतम अदाणी के खिलाफ अमेरिका में चल रहे आपराधिक मुकदमे के कारण दबाव में आकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को मंजूरी दी है। राजधानी भोपाल में कांग्रेस की ओर से आयोजित 'किसान महाचौपाल' को संबोधित करते हुए पार्टी के पूर्व अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री को चुनौती दी कि अगर उनमें हिम्मत है तो वह इस करार को रद्द करके दिखाएं।
उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी 'कम्प्रोमाइज्ड (झुक गये)' हैं। उनको फंसा दिया गया है। नरेन्द्र मोदी ने दबाव में आकर यह करार किया है। यह डील (करार) नहीं है, यह किसान के दिल में तीर है।'' यह सवाल उठाते हुए कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता चार महीने से रुका हुआ था। ऐसा क्या हुआ जो प्रधानमंत्री मोदी अचानक इसके लिए तैयार हो गए, राहुल गांधी ने कहा कि इसके दो कारण हैं। पहला कारण अमेरिका में पड़ी हुई लाखों एप्स्टीन फाइल हैं।.. उसमें ईमेल हैं, मैसेज हैं और वीडियो हैं। गांधी ने दावा किया कि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम अमेरिका में जारी 'एप्स्टीन फाइल्स' में शामिल है और प्रधानमंत्री मोदी को धमकाने के लिए उनका नाम जारी किया गया है।
उन्होंने कहा कि ऐसा करके अमेरिका ने यह संदेश दिया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी बात नहीं मानी तो फाइलों में से सबूत निकलेगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि व्यापार समझौते पर प्रधानमंत्री मोदी के सहमत होने का दूसरा कारण अमेरिका में अदाणी के खिलाफ चल रहा आपराधिक मुकदमा है। उन्होंने कहा, ''अमेरिका में जो यह मामला है, उसका लक्ष्य अदाणी नहीं है। उसका लक्ष्य नरेन्द्र मोदी हैं। वह तीर अदाणी की ओर नहीं मारा जा रहा है, वह तीर नरेन्द्र मोदी जी की ओर मारा जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी को चुनौती दी कि अगर उनमें दम है तो समझौते को रद्द करके दिखाएं।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी छवि और अपने राजनीतिक भविष्य को बचाने के लिए हिंदुस्तान को अमेरिका के हाथों बेच दिया है, लेकिन.. अब नरेन्द्र मोदी बच नहीं सकते। उन्हें कोई शक्ति नहीं बचा सकती। व्यापार समझौते के माध्यम से प्रधानमंत्री ने भारत के कृषि, डेटा, कपड़ा और आयात क्षेत्रों के हितों से समझौता किया है। अमेरिका कहता है कि वह बांग्लादेश पर कपड़ों पर शून्य प्रतिशत शुल्क लगाएगा। फिर मोदी सरकार के मंत्री कहते हैं कि अगर भारत भी अमेरिका से कपास खरीदेगा तो उसका शुल्क भी शून्य प्रतिशत हो जाएगा, लेकिन हम अमेरिका से कपास नहीं खरीदते, क्योंकि कपास हमारे यहां उगाया जाता है। ऐसे में हमारा कपड़ा उद्योग खत्म हो जाएगा।
उन्होंने 21वीं सदी में 'डेटा' को सबसे जरूरी चीज करार दिया और कहा कि जिसके पास डेटा होगा वही जीतेगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि आज दुनिया में सबसे ज्यादा डेटा हिंदुस्तान के पास है। हिंदुस्तान के डेटा के बिना अमेरिका, चीन का मुकाबला नहीं कर सकता। लेकिन इस समझौते में नरेन्द्र मोदी ने हिंदुस्तान का सारा का सारा डेटा अमेरिका के हवाले कर दिया है। यानी, नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका से समझौता करके किसानों को तबाह कर दिया, हमारा डेटा सौंप दिया और हमारे कपड़ा उद्योग को ख़त्म कर दिया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं कि हिंदुस्तान हर साल नौ लाख करोड़ रुपये का सामान अमेरिका से खरीदेगा। सवाल है कि हमारे उद्योग और किसानों का क्या होगा?
उन्होंने दावा किया कि इसके उलट भारत अब ज्यादा शुल्क देगा, जबकि पहले हम कम शुल्क देते थे। डील में लिया कुछ नहीं, उल्टा सबकुछ बेच दिया। उन्होंने यह दावा भी किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से सलाह मशविरा किए बगैर ही अमेरिका के साथ समझौते को मंजूरी दे दी। गांधी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उन्हें बोलने नहीं दिए जाने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि हिंदुस्तान के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि जब लोकसभा में नेता विपक्ष को बोलने नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि वह पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की किताब पर अपनी बात रखना चाहते थे।
गांधी ने नरवणे की एक अप्रकाशित पुस्तक का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि चीन के टैंक भारतीय सीमा की तरफ आ रहे थे और उन्होंने कार्रवाई के मद्देनजर सरकार का आदेश जानने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर को फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। नरवणे जी ने अपनी किताब में लिखा है कि उस दिन हिंदुस्तान की सरकार और प्रधानमंत्री ने उन्हें और सेना को अकेला छोड़ दिया।'' युद्ध में जाने के फैसले को राजनीतिक फैसला बताते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब सेना प्रमुख को आदेश देने और चीन को रोकने का समय आया तो प्रधानमंत्री मोदी ''गायब'' हो गए।

