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ED Raid: चिट-फंड घोटाले में ईडी का शिकंजा, 182 बैंक खाते फ्रीज, एक करोड़ रुपये नकद जब्त

ED Raid: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कई राज्यों में 2,000 करोड़ रुपये के चिट फंड घोटाले के सिलसिले में छापेमारी के दौरान 182 बैंक खातों को 'फ्रीज' कर दिया है और एक करोड़ रुपये से अधिक नकद और छह महंगी...

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सांकेतिक फाइल फोटो
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ED Raid: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कई राज्यों में 2,000 करोड़ रुपये के चिट फंड घोटाले के सिलसिले में छापेमारी के दौरान 182 बैंक खातों को 'फ्रीज' कर दिया है और एक करोड़ रुपये से अधिक नकद और छह महंगी कारें जब्त की हैं।

ईडी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि उसके भुवनेश्वर क्षेत्रीय कार्यालय ने चिट फंड घोटाले की जांच के सिलसिले में पांच अगस्त को विशाखापत्तनम और हैदराबाद में 'वेलफेयर बिल्डिंग्स एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड' (डब्ल्यूबीईपीएल) और उसके निदेशकों से जुड़ी पांच जगहों पर धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत छापेमारी की कार्रवाई की।

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एजेंसी ने बताया कि आंध्र प्रदेश के पूर्व विधायक एम. वी. प्रसाद, वराह रामकृष्ण सत्य श्रीनिवास राव अल्ला और अन्य लोगों के परिसरों पर छापेमारी की गई थी। केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि छापेमारी के दौरान डब्ल्यूबीईपीएल, उसके निदेशकों और उससे जुड़ी कंपनियों से संबंधित 1.01 करोड़ रुपये नकद (भारतीय मुद्रा), कई चल-अचल संपत्ति और आपत्तिजनक सामग्री/दस्तावेज (जैसे संपत्ति के कागजात और कई डिजिटल उपकरण) बरामद और जब्त किए गए।

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ईडी ने 182 बैंक खातों को 'फ्रीज' करने के आदेश भी जारी किए हैं और साथ ही डब्ल्यूबीईपीएल और उसके निदेशकों की छह महंगी गाड़ियां भी जब्त की हैं। ईडी के भुवनेश्वर कार्यालय ने ओडिशा पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और झारखंड के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दर्ज कई प्राथमिकी और उसके बाद दाखिल आरोपपत्र के आधार पर जांच शुरू की थी।

ईडी के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, जांच के दौरान केंद्रीय एजेंसी को पता चला कि डब्ल्यूबीईपीएल के निदेशक और प्रबंध निदेशक ने विशाखापत्तनम में जमीन देने का झूठा वादा करके अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश और अन्य राज्यों के हजारों भोले-भाले निवेशकों से 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम गैर-कानूनी ढंग से इकट्ठा की थी।

बयान में कहा गया है कि बाद में कंपनी ने देश के कई राज्यों में मौजूद अपनी शाखाओं से कामकाज बंद कर दिया और इस तरह निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की। बयान के अनुसार निदेशकों ने निवेशकों के पैसे का इस्तेमाल अन्य कार्यों और निजी लाभ के लिए किया। उन्होंने जमा राशि को छिपाने के लिए वित्तीय विवरणों में हेरफेर की और भूमि संबंधी ऐसे अनियमित लेन-देन किए जिनका उद्देश्य वास्तविक सौदे की राशि को छिपाना और वैधानिक दायित्वों से बचना था।

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