कोरोना के बीच अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन की कवायद

ब्याज दरों में कोई फेरबदल नहीं, एक लाख करोड़ के सरकारी बॉन्ड खरीदने की तैयारी

कोरोना के बीच अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन की कवायद

नयी दिल्ली में बुधवार को केबिनेट के फैसलों के बाद प्रेसवार्ता को संबोधित करते केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल एवं प्रकाश जावडेकर। -मानस रंजन भुई

मुंबई, 7 अप्रैल (एजेंसी)

कोरोना वायरस संक्रमण के एक बार फिर बढ़ने के बीच अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को ब्याज दरों को रिकॉर्ड निचले स्तर पर बनाये रखा, जबकि खुले बाजार से इस तिमाही में एक लाख करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड खरीदने के कार्यक्रम की घोषणा की ताकि बैंकिंग तंत्र में धन का प्रवाह ठीक बना रहे। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2021-22 की पहली मौद्रिक समीक्षा में कहा कि वृद्धि को बनाए रखने के लिए जब तक जरूरी होगा, उदार रुख को बरकरार रखा जाएगा। आरबीआई की प्रमुख उधारी दर रेपो दर चार प्रतिशत पर और रिवर्स रेपो रेट या केंद्रीय बैंक की उधारी दर 3.35 प्रतिशत पर यथावत है। पिछले साल महामारी के चलते अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिए रेपो दर में कुल 1.15 प्रतिशत की कटौती की गई थी।

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसलों की घोषणा करते हुए कहा कि रेपो दर को चार प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। उन्होंने कहा, ‘सभी की सहमति से यह भी निर्णय लिया कि टिकाऊ आधार पर वृद्धि को बनाए रखने के लिए जब तक जरूरी हो, उदार रुख को बरकरार रखा जाएगा और अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 के असर को कम करने के प्रयास जारी रहेंगे।’ उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मुद्रास्फीति तय लक्ष्य के भीतर बनी रहे। सीमांत स्थायी सुविधा दर और बैंक दर 4.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित है। रिवर्स रेपो दर भी 3.35 प्रतिशत बनी रहेगी। चालू वित्त वर्ष में यह पहली द्विमासिक नीतिगत समीक्षा बैठक है। गवर्नर ने द्वितीयक बाजार सरकारी प्रतिभूति खरीद कार्यक्रम या जी-सैप 1.0 की घोषणा भी की, जिसके तहत आरबीआई ने खुले बाजार से सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदने की प्रतिबद्धता जताई। इसके तहत अप्रैल-जून के दौरान एक लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे जाएंगे और पहली खरीद 15 अप्रैल से शुरू होगी।

कर्ज लौटाने को लेकर मोहलत की जरूरत नहीं : आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि फिलहाल कर्ज भुगतान के लिये मोहलत देने की जरूरत नहीं है। कंपनियां स्थिति से निपटने के लिये बेहतर रूप से तैयार हैं। देश भर में कोरोना वायरस संक्रमितों की बढ़ती संख्या और उसकी रोकथाम के लिये स्थानीय स्तर पर लगाये जा रहे ‘लॉकडाउन’ के बीच उन्होंने यह बात कही।

प्रीपेड भुगतान साधनों के बीच पारस्परिकता अनिवार्य

प्रीपेड भुगतान साधन जारीकर्ताओं द्वारा आपस में प्रणालियों की पारस्परिकता को नहीं अपनाने पर नाराजगी जताते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि ऐसी कंपनियों को इस बात का प्रावधान करना होगा कि केवाईसी को पूरा करने वाले उसके ग्राहक दूसरी कंपनियों के ग्राहकों के साथ लेनदेन कर सकें। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने दिन के अंत में किसी पेमेंट बैंक के एक खाते में रहने वाली अधिकतम धनराशि की सीमा को बढ़ाकर दो लाख कर दिया। गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि प्रीपेड भुगतान साधनों (पीपीआई) को 2018 में पारस्परिकता को अपनाने का विकल्प दिया गया था, जिसमें एक कंपनी के ग्राहक दूसरे पीपीआई या बैंकों के ग्राहकों को धनराशि भेज सकते हैं। यह विकल्प उन मामलों में दिया गया था, जहां केवाईसी पूरा हो चुका है। दास ने कहा, ‘दो साल बीतने के बावजूद पूर्ण केवाईसी पीपीआई की ओर स्थानांतरण नहीं हुआ और इसलिए पारस्परिकता नहीं है। इसलिए पूर्ण केवाईसी पीपीआई के लिए पारस्परिकता को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव है।’

एसी, एलईडी लाइट के लिये 6,238 करोड़ की प्रोत्साहन योजना

नयी दिल्ली (एजेंसी) : सरकार ने बुधवार को एयर कंडीशनर और एलईडी लाइट के लिये 6,238 करोड़ रुपये के व्यय से उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को मंजूरी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि एसी और एलईडी के लिये पीएलआई योजना की मंजूरी से इन क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को मजबूती मिलेगी। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना का मकसद संबंधित क्षेत्रों की अक्षमताओं को दूर कर, पैमाने की मितव्ययिता के साथ दक्षता सुनिश्चित कर देश में वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी विनिर्माण को बढ़ावा देना है। योजना से वैश्विक निवेश आकर्षित होने, बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित होने और सतत रूप से निर्यात बढ़ने की उम्मीद है।

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