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हिसार CIA स्टाफ विवाद मामले में हाई कोर्ट ने पुलिस से मांगा जवाब, अगली सुनवाई 30 अप्रैल को

पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने की है मामले की निष्पक्ष जांच की मांग

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हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को हिसार में सीआईए स्टाफ के साथ हुए विवाद के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने हिसार के पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।

दुष्यंत चौटाला ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि सीआईए स्टाफ के साथ हुए इस विवाद की जांच सीबीआई या किसी अन्य स्वतंत्र जांच एजेंसी, जैसे चंडीगढ़ पुलिस या पंजाब पुलिस से करवाई जाए। साथ ही सीसीटीवी फुटेज को भी सुरक्षित रखने की अपील की गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि चूंकि इस पूरे घटनाक्रम की जांच फिलहाल हरियाणा पुलिस कर रही है, इसलिए अदालत अपनी तरफ से कोई आदेश जारी नहीं करेगी।

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हालांकि, अदालत ने दोनों पक्षों की तरफ से दी गई शिकायतों के संबंध में हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को एक संक्षिप्त हलफनामा (शॉर्ट एफिडेविट) दायर करने के भी निर्देश दिए हैं। हरियाणा सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता (Additional AG) विक्रांत पंबू पेश हुए। अगली सुनवाई 30 अप्रैल 2026 को होगी।

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जीजेयू में प्रदर्शन से भड़की थी विवाद की चिंगारी

गौरतलब है कि इस पूरे विवाद की शुरुआत हिसार की गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी (जीजेयू) में हुए एक प्रदर्शन से हुई थी। 16 अप्रैल 2026 को जेजेपी नेता दिग्विजय चौटाला अपने समर्थकों के साथ जीजेयू के वीसी ऑफिस पर प्रदर्शन करने पहुंचे थे। आरोप है कि इस दौरान गेट तोड़ने का प्रयास हुआ। यूनिवर्सिटी प्रशासन की शिकायत पर दिग्विजय सहित 8 लोगों पर केस दर्ज किया गया और पुलिस ने कुछ नेताओं को गिरफ्तार कर लिया।

सब्जी मंडी पुल पर पुलिस और काफिले में हुआ था टकराव

इसके अगले दिन 17 अप्रैल को जब दुष्यंत और दिग्विजय चौटाला समर्थकों के साथ सिटी थाने में सामूहिक गिरफ्तारी देने जा रहे थे, तब हिसार के सब्जी मंडी पुल के पास असली विवाद हुआ। दुष्यंत चौटाला का आरोप है कि सिविल ड्रेस में सीआईए इंचार्ज पवन कुमार ने एक निजी बोलेरो गाड़ी उनके काफिले के आगे अड़ा दी और उन पर पिस्तौल तानी।

उन्होंने पुलिस पर अभद्रता का आरोप लगाते हुए एफआईआर की मांग की थी। दूसरी तरफ, पुलिस अधिकारियों ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दुष्यंत के काफिले में शामिल एक पायलट गाड़ी लापरवाही से चलाई जा रही थी और उसने पुलिस की गाड़ी को टक्कर मारने की कोशिश की, जिसके बाद सीआईए इंचार्ज ने गाड़ी रोककर केवल चेतावनी दी थी। एफआईआर दर्ज न होने पर दुष्यंत ने हाईकोर्ट का रुख किया था।

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