DRDO BMD Test: भारत की बड़ी सैन्य उपलब्धि, बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम और नई नौसैनिक मिसाइल का सफल परीक्षण
DRDO BMD Test: डीआरडीओ ने लगातार तीन सफल उड़ान परीक्षणों के जरिए बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा क्षमता का प्रदर्शन किया, नौसेना के लिए एंटी-शिप मिसाइल का भी सफल परीक्षण
DRDO BMD Test: भारत ने अपनी वायु एवं मिसाइल रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ विकसित बहुस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (BMD) प्रणाली का सफल परीक्षण किया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 10 और 11 जून को लगातार तीन सफल उड़ान परीक्षण कर इस क्षमता का प्रदर्शन किया।
रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि परीक्षणों के दौरान दागी गई इंटरसेप्टर मिसाइलों ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेदते हुए आने वाले खतरों को निष्क्रिय कर दिया। मंत्रालय के अनुसार, इन प्रणालियों को उभरते मिसाइल खतरों से निपटने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों से विकसित किया गया है।
मंत्रालय ने कहा कि इन सफल परीक्षणों के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जिनके पास अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) स्तर तक की मिसाइलों को रोकने की क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली मौजूद है।
सैन्य शब्दावली में ICBM ऐसी मिसाइलों को कहा जाता है जिनकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर से अधिक होती है। BMD प्रणाली का उद्देश्य ऐसी आने वाली मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही हवा में नष्ट करना होता है।
The @DRDO_India has successfully demonstrated multiple crucial technologies bolstering nations defence capabilities against different types of enemy threats.
Three consecutive flight-tests were successfully conducted to demonstrate multi-layered defence against long range… pic.twitter.com/0DKQF0LB30
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) June 13, 2026
नौसेना की नई एंटी-शिप मिसाइल का भी सफल परीक्षण
इन परीक्षणों की श्रृंखला के दौरान डीआरडीओ ने नौसेना के लिए विकसित मध्यम दूरी की नई एंटी-शिप मिसाइल नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का भी पहला सफल उड़ान परीक्षण किया। यह मिसाइल समुद्र में दुश्मन के युद्धपोतों और अन्य नौसैनिक लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है।
दो दशक से जारी है मिसाइल रक्षा प्रणाली का विकास
भारत पिछले करीब दो दशकों से मिसाइल इंटरसेप्टर तकनीक पर काम कर रहा है। वर्ष 2006-07 में उच्च ऊंचाई पर दुश्मन की मिसाइलों को रोकने के लिए पृथ्वी एयर डिफेंस (PAD) इंटरसेप्टर का पहला परीक्षण किया गया था। इसके बाद कम ऊंचाई पर अवरोधन के लिए एडवांस्ड एयर डिफेंस (AAD) इंटरसेप्टर का परीक्षण हुआ।
वर्ष 2017 और 2018 के दौरान ओडिशा तट से PAD और AAD प्रणालियों के कई सफल परीक्षण किए गए, जिनमें नकली बैलिस्टिक मिसाइल लक्ष्यों को अत्यधिक सटीकता के साथ नष्ट किया गया था।
अप्रैल 2023 में भारत ने समुद्र आधारित बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा इंटरसेप्टर का पहला सफल परीक्षण किया था। वहीं 2022 और जुलाई 2024 में भी BMD प्रणाली के कई महत्वपूर्ण परीक्षण किए गए।
ICBM स्तर के खतरों से निपटने की दिशा में बड़ा कदम
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, हालिया परीक्षण भारत की अगली पीढ़ी की मिसाइल रक्षा क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं। इनका उद्देश्य लंबी दूरी, अधिक गति और ICBM श्रेणी के खतरों को भी निष्क्रिय करने की क्षमता हासिल करना है।
राजनाथ सिंह ने दी बधाई
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर डीआरडीओ की वैज्ञानिक टीम और सभी साझेदार संस्थानों को बधाई दी। वहीं रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष Rajesh Kumar Singh ने परीक्षणों की निगरानी की और वैज्ञानिकों व उद्योग साझेदारों के संयुक्त प्रयासों की सराहना की।

