उत्तर प्रदेश में एसआईआर के बाद मसौदा मतदाता सूची जारी, 2.89 करोड़ नाम कटे
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंगलवार को मसौदा मतदाता सूची जारी कर दी गई। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने बताया कि नई सूची में 12...
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंगलवार को मसौदा मतदाता सूची जारी कर दी गई। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने बताया कि नई सूची में 12 करोड़ 55 लाख 56 हजार 25 मतदाता शामिल हैं, जबकि पिछले वर्ष 27 अक्तूबर को जारी सूची में 15 करोड़ 44 लाख से अधिक मतदाता थे। इस प्रकार लगभग 2 करोड़ 89 लाख नाम सूची से हटाए गए हैं।
सीईओ के अनुसार 46.23 लाख मतदाता मृत पाए गए, 2.57 करोड़ मतदाता स्थायी रूप से बाहर चले गए या सत्यापन के दौरान उपलब्ध नहीं थे, जबकि 25.47 लाख नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए गए। उन्होंने बताया कि मसौदा सूची पर दावे और आपत्तियां 6 जनवरी से 6 फरवरी तक दर्ज कराई जा सकेंगी। इस प्रक्रिया में राज्य के सभी 75 जिले, 403 विधानसभा क्षेत्र, 1.72 लाख बूथ और 5.76 लाख से अधिक बूथ स्तरीय एजेंट शामिल रहे।
भाजपा आईटी प्रकोष्ठ की मोबाइल एप का इस्तेमाल : ममता बनर्जी
गंगासागर : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि निर्वाचन आयोग राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए भाजपा आईटी प्रकोष्ठ द्वारा विकसित मोबाइल एप का इस्तेमाल कर रहा है। गंगासागर में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि एसआईआर के नाम पर योग्य मतदाताओं को मृत घोषित किया जा रहा है और बुजुर्ग व बीमार लोगों को परेशान किया जा रहा है। ममता ने इसे गैरकानूनी और असंवैधानिक बताया। उन्होंने लोगों से सावधानी बरतने और जरूरतमंदों की मदद करने की अपील की। तृणमूल कांग्रेस ने इस प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया है।
मेरे और परिवार का नाम एसआईआर से गायब : सप्पल
नयी दिल्ली : कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की मसौदा सूची पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उनका और उनके परिवार के सदस्यों के नाम सूची से गायब हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास सभी वैध दस्तावेज हैं और 2003 सहित पिछले चुनावों की मतदाता सूचियों में भी उनके नाम दर्ज थे। सप्पल के अनुसार, साहिबाबाद से नोएडा विधानसभा क्षेत्र में पता स्थानांतरित कराने के कारण नाम हटाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे करोड़ों वास्तविक मतदाता प्रभावित हो सकते हैं।

