Donation Controversy : अयोध्या के बाद अब मथुरा में घोटाला? श्रीकृष्ण जन्मभूमि के दान पर उठे सवाल, सीबीआई जांच की मांग से मचा हड़कंप
श्रीकृष्ण जन्मस्थान में दान प्रबंधन की सीबीआई जांच की मांग, न्यास ने आरोपों को बताया निराधार
Donation Controversy : श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के एक सदस्य ने मथुरा स्थित मंदिर में दान के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से (सीबीआई) जांच कराने की मांग की और दावा किया कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान से जुड़े कथित गबन जैसी स्थिति यहां भी हो सकते हैं। ये आरोप ऐसे समय सामने आए हैं, जब अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान के कथित गबन के मामले में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) जांच कर रहा है।
दिनेश फलाहारी महाराज ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली दान राशि और आभूषणों का वर्षों से दुरुपयोग किया जा रहा है। दान की गिनती के दौरान सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए जाते हैं। समिति के कुछ सदस्यों ने निजी संपत्ति अर्जित की है, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। फलाहारी महाराज ने कहा, ''हमें आशंका है कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान में भी इसी (श्रीराम जन्मभूमि मंदिर) तरह की अनियमितताएं हो रही हैं। मामले की सीबीआई जांच कराई जानी चाहिए।''
उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांग स्वीकार नहीं की गई तो वह इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख करेंगे। वहीं, आरोपों को खारिज करते हुए श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने कहा कि मंदिर में दान के प्रबंधन के लिए पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था अपनाई जाती है और संस्थान किसी भी जांच के लिए तैयार है। ये आरोप निराधार हैं। हम किसी भी जांच के लिए तैयार हैं। दान की गिनती की प्रक्रिया तीन कर्मचारियों की मौजूदगी में सीसीटीवी निगरानी के तहत की जाती है और इस कार्य में लगे कर्मचारियों की समय-समय पर अदला-बदली भी की जाती है। सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखी जाती है।
शर्मा ने कहा कि हम व्यवस्था को और आधुनिक बना रहे हैं तथा सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जा रही है। मंदिर परिसर के बाहर कोई दान काउंटर नहीं है और सारा चढ़ावा मंदिर परिसर के भीतर ही स्वीकार किया जाता है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा जांच से गुजरना होता है और उन्हें पर्स, माला, प्रसाद या मोबाइल फोन भीतर ले जाने की अनुमति नहीं होती, जिससे किसी व्यक्ति के लिए बड़ी मात्रा में नकदी या आभूषण अंदर ले जाना मुश्किल हो जाता है। मंदिर की ओर से 5,000 रुपये से अधिक का नकद भुगतान नहीं किया जाता है और दान प्रबंधन को लेकर आयकर विभाग की ओर से कोई नोटिस भी नहीं मिला है।

