Digital Arrest Cases: सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, डिजिटल अरेस्ट के तीन मामलों में 89 जगहों पर तलाशी, तीन गिरफ्तार
Digital Arrest Cases: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 20 राज्यों में 89 जगहों पर तलाशी ली और डिजिटल अरेस्ट के तीन अलग-अलग मामलों के सिलसिले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया। इन मामलों में 42 करोड़ रुपये से अधिक की...
Digital Arrest Cases: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 20 राज्यों में 89 जगहों पर तलाशी ली और डिजिटल अरेस्ट के तीन अलग-अलग मामलों के सिलसिले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया। इन मामलों में 42 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ठग ली गई थी।
पूरे देश में चलाए गए अभियान के बाद, एजेंसी ने कहा कि उसने बैंकिंग दस्तावेज, खातों से जुड़े रिकॉर्ड, डिजिटल उपकरण और दूसरे अहम सबूत बरामद किए हैं। अब इन सबूतों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि अलग-अलग राज्यों में 'डिजिटल अरेस्ट' सिंडिकेट को चलाने वाले 'बड़े वित्तीय और प्रौद्योगिकी ढांचे' का पता लगाया जा सके।
'डिजिटल अरेस्ट' में साइबर अपराधी खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर पीड़ित को वीडियो कॉल के जरिए डरा-धमकाकर डिजिटल रूप से बंधक बना लेते हैं और उनसे पैसे ऐंठते हैं। सीबीआई प्रवक्ता बीना यादव ने एक बयान में कहा, ''सीबीआई ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। तलाशी के दौरान उनसे पूछताछ में धोखाधड़ी से मिली रकम को लेने, उसे अलग अलग तरीकों से आगे भेजने में उनकी खास और अहम भूमिका का पता चला।''
उन्होंने कहा कि गिरफ्तार लोगों में हरियाणा का रहने वाला आकाश भी शामिल है। आरोप है कि धोखाधड़ी की रकम में से 1.95 करोड़ रुपये उसके खाते में आए थे। अधिकारियों ने बताया कि उसने खुद यह खाता खोला था और उसी दिन रकम को दूसरे खाते में फौरन हस्तांतरित कर दिया था, जिससे यह साबित होता है कि धनशाोधन में उसकी सीधी भूमिका थी। उनके मुताबिक दूसरा आरोपी कोलकाता का राजा करमाकर है।
आरोप है कि धोखाधड़ी से मिली रकम में से 1.5 करोड़ रुपये उसकी फर्म के खाते में आए थे। वहीं, तीसरी आरोपी ज्योति रानी के खाते में धोखाधड़ी की रकम का कुछ हिस्सा जमा हुआ था; उसने इसमें से कुछ हिस्सा नकदी में निकाला और बाकी रकम दूसरे खाते में भेज दी।
'डिजिटल अरेस्ट' का पहला मामला बिट्स-पिलानी का है, जहां ठगों ने पुलिस अधिकारी बनकर एक पीड़ित को तीन महीने तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा और उससे 7.67 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। प्रवक्ता ने कहा, ''एक और मामले में, ठगों ने गुजरात में एक पीड़ित को 3 महीने तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा और पुलिस अधिकारी बनकर 19.24 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।
तीसरा मामला कर्नाटक का है, जिसमें एक पीड़ित को एक महीने तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया और उससे 15.45 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई।''

