590 करोड़ की गड़बड़ी पर नायब सरकार का तेज सर्जिकल एक्शन, 24 घंटे में पूरी रिकवरी, हाई लेवल कमेटी गठित
सीएम सैनी बोले, सरकारी पैसा पूरी तरह सुरक्षित, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कर्मचारियों पर एफआईआर
हरियाणा के इतिहास में संभवतः पहली बार किसी वित्तीय गड़बड़ी पर सरकार ने इतनी त्वरित और निर्णायक कार्रवाई की है। सरकारी खातों से जुड़ी 590 करोड़ रुपये की संदिग्ध बैंकिंग गड़बड़ी सामने आते ही प्रदेश सरकार ने महज 24 घंटे के भीतर 556 करोड़ रुपये मूलधन और 22 करोड़ रुपये ब्याज सहित पूरी राशि सरकारी खातों में वापस जमा करा ली।
मंगलवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि यह साबित करता है कि सरकार हर पैसे की निगरानी और सुरक्षा को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने इस गंभीर मामले की जांच के लिए वित्त सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने की घोषणा की। यह कमेटी न केवल गड़बड़ी में शामिल सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की जांच करेगी, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए मजबूत निगरानी तंत्र, वित्तीय प्रोटोकॉल और तकनीकी सुरक्षा उपायों पर भी सिफारिशें देगी।
विधानसभा में घमासान, सरकार का पलटवार
बजट सत्र के तीसरे दिन कांग्रेस ने विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर सरकार पर सवाल उठाए। इस पर मुख्यमंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि पहले की सरकारों में गड़बड़ियों की फाइलें दबा दी जाती थीं, इसलिए घोटाले सामने नहीं आते थे। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार में कोई भी मामला छिपाया नहीं जाता। पूरा पैसा रिकवर कर लिया गया है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
सीएम के बयान पर कांग्रेस विधायकों ने सदन में हंगामा किया, लेकिन 24 घंटे में रिकवरी और त्वरित कार्रवाई की टाइमलाइन ने विपक्ष को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया।
कर्मचारियों की मिलीभगत का संदेह
सरकार के अनुसार यह गड़बड़ी चंडीगढ़ स्थित दो बैंकों में सामने आई। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा और यूटी के सेक्टर 32 स्थित एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में संदिग्ध लेनदेन पाए गए। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक लोअर लेवल के कुछ कर्मचारियों ने सरकारी खातों से अनधिकृत रूप से राशि इधर उधर ट्रांसफर की। आशंका है कि इस मामले में कुछ बाहरी लोग भी शामिल हो सकते हैं।
ऐसी गड़बड़ियां आमतौर पर बैंकिंग सिस्टम में आंतरिक फ्लैगिंग के जरिए पकड़ी जाती हैं। इसी तकनीकी अलर्ट ने पूरे मामले का खुलासा किया।
बैंक ने मानी गड़बड़ी, चार कर्मचारी सस्पेंड
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को सूचना देकर स्वीकार किया कि उसके कुछ कर्मचारियों ने सरकारी खातों में अनधिकृत ट्रांजैक्शन किए। इसके बाद बैंक ने चार संदिग्ध कर्मचारियों को तत्काल सस्पेंड कर दिया। एक स्वतंत्र बाहरी एजेंसी से फॉरेंसिक ऑडिट शुरू कराया गया।
संदिग्ध ट्रांजैक्शन वाले खातों को चिह्नित करने के लिए अन्य बैंकों को रिकॉल रिक्वेस्ट भेजी गई और पूरी घटना की जानकारी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को भी दी गई। 20 फरवरी को बैंक की स्पेशल फ्रॉड मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक हुई, जबकि 21 फरवरी को ऑडिट कमेटी और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में धोखाधड़ी से जुड़े दस्तावेज और रिकवरी प्लान साझा किया गया।
एफआईआर और समानांतर जांच
विधानसभा में मामला उठने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने पंचकूला सेक्टर 17 थाने में एफआईआर दर्ज की। एफआईआर नंबर 4 में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कर्मचारियों के साथ अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। मामला पीसी एक्ट और आर्थिक अपराध की गंभीर धाराओं के तहत दर्ज हुआ है। जांच डीएसपी शुक्रपाल को सौंपी गई है।
साथ ही, विजिलेंस विभाग भी समानांतर जांच कर रहा है।
कमेटी करेगी जवाबदेही तय
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का पैसा वापस आ चुका है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। वित्त सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी यह भी पता लगाएगी कि हरियाणा सरकार के कौन अधिकारी और कर्मचारी इस गोलमाल में संलिप्त थे। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।
इसके अलावा भविष्य के लिए मजबूत वित्तीय सुरक्षा ढांचा तैयार करने पर भी कमेटी अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
टेक्निकल ट्रैकिंग से खुलासा
जांच सूत्रों के अनुसार सरकारी विभागों के खातों में कुछ अनियमित ट्रांजैक्शन फ्लैग हुए थे। प्रारंभिक जांच में पता चला कि कुछ लेनदेन बिना अधिकृत अनुमति के किए गए। रकम को कई खातों में बांटा गया और बाहरी लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई।
गड़बड़ी की पुष्टि होते ही बैंक ने सरकार को सूचित किया और तत्परता से रिकवरी प्रक्रिया शुरू कर दी गई। 24 घंटे के भीतर पूरी राशि वापस आ जाना इस मामले को प्रशासनिक सतर्कता और तकनीकी निगरानी के बड़े उदाहरण के रूप में पेश कर रहा है।

