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13 परीक्षाएं रद्द करने की मांग, सिर्फ 3 पर कार्रवाई; झारखंड सरकार पर प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप

झारखंड में नौकरी परीक्षा विवाद फिर गरमाया, छात्रों ने CBI जांच की मांग दोहराई

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प्रतीकात्मक तस्वीर
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Jharkhand Student Protest : झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों की 98 प्रतिशत मांगें स्वीकार करने के सरकार द्वारा नियुक्त एक समिति के दावा करने के महज दो घंटे बाद, प्रदर्शनकारियों ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नीत सरकार पर "झूठ फैलाने" का आरोप लगाया। छात्रों का कहना है कि सरकार ने 13 प्रतियोगी परीक्षाओं में से केवल तीन को रद्द करने पर सहमति जताई है।

आंदोलनकारी छात्रों ने अपने शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शन और 10 अगस्त को प्रस्तावित 'विधानसभा मार्च' के लिए आम जनता तथा राजनीतिक दलों से समर्थन मांगा। प्रदर्शनकारियों ने यहा एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि वे किसी भी असामाजिक तत्व को अपने लोकतांत्रिक आंदोलन में खलल नहीं डालने देंगे। एक छात्र नेता ने आरोप लगाया, "झारखंड सरकार यह झूठ फैला रही है कि उसने हमारी 98 प्रतिशत मांगें पूरी कर दी हैं। हमने जिन 13 परीक्षाओं को रद्द करने की मांग की थी, उनमें से केवल तीन ही रद्द की गई हैं। हम झारखंड के सभी छात्रों से अपील करते हैं कि वे राज्य द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं को उजागर करने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा (सीबीआई) जांच की हमारी मांग के समर्थन में सोमवार को होने वाले 'विधानसभा मार्च' में शामिल हों।"

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एक अन्य छात्र नेता रवींद्र पासवान ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह "सीआईडी जांच पर अड़ी हुई है, जो केवल लीपापोती करने के लिए जानी जाती है।" प्रदर्शनकारियों ने दोहराया कि उनका विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रहेगा। एक अन्य छात्र नेता ने कहा, "हम असामाजिक तत्वों को अपने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन को बाधित करने की इजाजत नहीं देंगे।" छात्रों ने जनता और राजनीतिक दलों से सोमवार के आंदोलन को जन आंदोलन बनाने की अपील की और अभिभावकों से बिना किसी राजनीतिक बैनर के अपने बच्चों के आंदोलन को नैतिक समर्थन देने का अनुरोध किया।

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एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "हम झारखंड में नौकरी बेचने के इस तंत्र को खत्म करना चाहते हैं; हमारा आंदोलन पूरी तरह से अहिंसक है।" छात्रों का यह बयान ऐसे समय आया जब झारखंड सरकार की एक समिति ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 98 फीसदी मांगें माने जाने के बावजूद छात्र अपना प्रदर्शन वापस नहीं ले रहे हैं। भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का विरोध-प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन में प्रवेश कर गया, जबकि इनमें से छह छात्र भूख हड़ताल पर हैं।

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