Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
Add Tribune As Your Trusted Source
search-icon-img
Advertisement

मुझे गुस्सा शांत करने के लिए फंसाया गया... ताहिर हुसैन की सजा पर फिर होगी सुनवाई, दिल्ली HC ने तलब किया रिकॉर्ड

आईबी अधिकारी की हत्या: दिल्ली हाई कोर्ट ने ताहिर हुसैन की अपील पर पुलिस से जवाब मांगा

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
featured-img featured-img
प्रतीकात्मक तस्वीर
Advertisement

Delhi Riots Case : दिल्ली हाई कोर्ट ने फरवरी 2020 के दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो (आईबी) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में अपनी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को चुनौती देने वाली आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन की याचिका पर बुधवार को पुलिस से जवाब मांगा।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने हुसैन की अपील को विचारार्थ स्वीकार कर लिया और इसे दो दिसंबर को सुनवाई के लिए अन्य संबंधित अपीलों के साथ सूचीबद्ध किया। अदालत ने जेल अधिकारियों को दोषी का विवरण रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया और मामले में अधीनस्थ अदालत के रिकॉर्ड भी तलब किए।

Advertisement

हुसैन ने इस मामले में उन्हें दोषी ठहराने और सजा सुनाने संबंधी अधीनस्थ अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि जांच का उद्देश्य जनता के गुस्से को शांत करने के लिए उन्हें फंसाना था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 26 फरवरी 2020 को शिकायतकर्ता रविंदर कुमार ने दयालपुर थाने के अधिकारियों को सूचित किया कि खुफिया ब्यूरो (आईबी) में तैनात उनका बेटा अंकित शर्मा 25 फरवरी 2020 से लापता है।

Advertisement

बाद में उन्हें कुछ स्थानीय लोगों से पता चला कि एक व्यक्ति की हत्या करने के बाद उसका शव चांद बाग पुलिया की मस्जिद से खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया है। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि शर्मा का शव खजूरी खास नाले से बरामद किया गया और उनके शरीर पर चोट के 51 निशान थे।

अधीनस्थ अदालत ने 31 जुलाई को हुसैन और चार अन्य दोषियों - नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को आईबी अधिकारी की हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने कहा कि यह मामला ''दुर्लभतम से दुर्लभ'' अपराध की श्रेणी में नहीं आता जिसके लिए मौत की सजा दी जा सके। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी 2020 को सांप्रदायिक झड़पें हुई थीं। नागरिकता कानून के समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के बाद भड़की हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे।

Advertisement
×