Delhi-NCR Pollution : दिल्ली की हवा पर भारी पड़ती ‘स्टेटस सिंबल’ मानसिकता, CJI बोले- कार बन गई है प्रतिष्ठा का प्रतीक
वायु प्रदूषण के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान बोले प्रधान न्यायाधीश : ‘प्रतिष्ठा का प्रतीक' बन गई है कार
Delhi-NCR Pollution : प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने मंगलवार को कहा कि कार ‘प्रतिष्ठा का प्रतीक' बन गई है और लोग साइकिल का इस्तेमाल बंद करने के बाद चार पहिया वाहन खरीदने के लिए पैसे बचा रहे हैं। प्रधान न्यायाधीश ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि वायु प्रदूषण की समस्या का एक समाधान यह हो सकता है कि लोगों के पास कई-कई कारें रखने की प्रवृत्ति कम की जाए।
इस पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कार अब प्रतिष्ठा का प्रतीक बन गई है…। लोग कार खरीदने के लिए पैसे बचा रहे हैं और साइकिल चलाना छोड़ चुके हैं। बहस के दौरान द्विवेदी ने कहा कि ऑटोमोबाइल उद्योग बहुत शक्तिशाली है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “अमीर लोगों को भी त्याग करना चाहिए। महंगी गाड़ियों के बजाय उन्हें अच्छी इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) अपना काम ठीक से नहीं कर रहा है। अदालत ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण संस्था को इस बात पर फटकार लगाई कि उसने दिल्ली की सीमाओं पर यातायात जाम कम करने के लिए टोल प्लाजा को अस्थायी रूप से बंद करने या कहीं और स्थानांतरित करने के मुद्दे पर दो महीने की मोहलत मांगी है।
शीर्ष अदालत ने सीएक्यूएम की कार्यशैली में "गंभीरता" की कमी की आलोचना की और कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वह बिगड़ते वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के कारणों की पहचान करने या दीर्घकालिक समाधान खोजने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखा रही है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने सीएक्यूएम को दो सप्ताह के भीतर विशेषज्ञों की बैठक बुलाने और प्रदूषण के बिगड़ते स्तर के प्रमुख कारणों पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

