Delhi Fire Accident : न फायर NOC, न सुरक्षा इंतजाम; मालवीय नगर होटल में कैसे चल रहा था कारोबार?
सूचित किए बिना ही इमारत में अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण किया गया
Delhi Fire Accident : दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में बुधवार को जिस होटल में आग लगने से कम से कम 21 लोगों की मौत हुई, उसमें निर्धारित क्षमता से करीब चार गुना ज्यादा लोगों को ठहराया जा रहा था और उसके पास जरूरी अग्नि सुरक्षा मंजूरी भी नहीं थी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों को सूचित किए बिना ही इमारत में अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण किया गया था।
खिड़कियां स्थायी रूप से बंद थीं
इस अग्निकांड में मारे गए लोगों में 11 विदेशी नागरिक शामिल हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती 35 घायलों में से कम से कम 19 की हालत गंभीर बनी हुई है। आग मालवीय नगर के हौज रानी स्थित ''फ्लोरिश स्टे बी एंड बी' में सुबह करीब 8.30 बजे लगी। यह आग पांच मंजिला संकरी इमारत में तेजी से फैल गई, जिसमें आने-जाने का केवल एक ही रास्ता था, खिड़कियां स्थायी रूप से बंद थीं और मुख्य दरवाजा सेंसर से संचालित था। इन सभी कारकों ने मिलकर इमारत को जानलेवा भवन बना दिया था। दिल्ली सरकार की 'बेड-एंड-ब्रेकफास्ट' नीति के तहत इस प्रतिष्ठान को केवल छह कमरों की अनुमति थी, लेकिन यह कथित तौर पर लगभग 25 कमरों का संचालन कर रहा था, जिसमें तहखाने के कुछ कमरे भी शामिल हैं।
इमारत की ऊंचाई 15 मीटर से अधिक थी
प्रारंभिक जांच से पता चला है कि करीब छह से सात साल पहले इस इमारत में केवल भूतल और एक मंजिल थी, जब अग्नि सुरक्षा मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती थी। बाद में अधिकारियों को सूचित किए बिना कथित तौर पर अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई। अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद कभी भी पूरी भवन योजना को जमा नहीं किया गया। इमारत की ऊंचाई 15 मीटर से अधिक थी, जिससे अग्नि सुरक्षा मंजूरी या अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) अनिवार्य हो गया था। हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि उन्हें न तो आवश्यक दस्तावेज मिले। न ही मालिक की ओर से कोई जवाब मिला, और कभी भी कोई अग्नि सुरक्षा मंजूरी जारी नहीं की गई थी। इस इमारत के भूतल पर एक रेस्तरां था जबकि तहखाने और ऊपरी मंजिलों का उपयोग होटल के रूप में किया जा रहा था।
बिजली के उपकरण चालू करने के कुछ ही देर बाद लगी
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आग संभवतः भूतल पर रेस्तरां में एक खानसामे के आने और काम शुरू करने से पहले बिजली के उपकरण चालू करने के कुछ ही देर बाद लगी। इसके तुरंत बाद कथित तौर पर विस्फोट जैसी आवाज सुनी गई, जिसके बाद लपटें तेजी से फैल गईं। उप मुख्य दमकल अधिकारी ए के मलिक ने बताया कि जहां तक अग्नि संबंधी का सवाल है, हमें न तो इमारत के पदााधिकारियों से और न ही लाइसेंसिंग एजेंसी से कोई संदर्भ प्राप्त हुआ था। मालिक ने ट्रेड लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, लेकिन पूरी भवन योजना जमा नहीं की गई थी। मालिक से भवन विभाग को योजना उपलब्ध कराने के लिए कहा गया था, जिसे दमकल विभाग के साथ साझा करना आवश्यक था, लेकिन यह प्रक्रिया कभी पूरी नहीं हुई। मलिक ने कहा कि इमारत के डिजाइन के कारण लोगों को बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो गया।
इमारत में भूतल और ऊपरी मंजिलों में एक सीढ़ी थी
इस तरह की इमारतें एक शाफ्ट की तरह काम करती हैं, जहां आग से पैदा होने वाली तपिश व धुआं कुछ ही सेकंड में पूरी संरचना को अपनी चपेट में ले सकता है, जिससे लोगों को बाहर निकालना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इमारत में भूतल और ऊपरी मंजिलों में एक सीढ़ी थी जबकि तहखाने में दो सीढ़ियां थीं। इस अभियान में करीब 80 दमकलकर्मी शामिल थे, जिसमें एक दमकलकर्मी घायल हो गया जबकि दूसरे को धुआं के कारण बाहर निकालना पड़ा। बचाव दलों ने तहखाने का शटर खोलने के लिए कटर का उपयोग किया और अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए बंद खिड़कियों को तोड़ने के लिए हथौड़ों का इस्तेमाल किया।

