सुपनीत। सुहानी। दिवांशी। वानीत। दीपिका। उदिता। योगिता। मुस्कान। हरलीन। रिया। अनमोल। पूर्णिमा। रुहानी। अलीशा। समज्या। आरना। देविना। अनुश्री। कशिश। अंशिका। अदिति। अर्पिता। शिखा। नंदिनी। सुरभि। ये चंद नाम हैं उन कुछ बेटियों के जिन्होंने पिछले दिनों बोर्ड परीक्षाओं में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। देश के कोने-कोने से अव्वल बेटियों के इन नामों की लंबी फेहरिस्त है।
पिछले दिनों पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र आदि राज्यों के शिक्षा बोर्ड के अलावा सीबीएसई और आईसीएसई ने परिणामों की घोषणा की। सुखद है कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद लाखों बेटियों ने फिर साबित किया कि अगर मंच मिल जाये तो ये अपने हुनर के पंखों को फैलाकर आसमान छू सकती हैं। संयोग देखिए कि इसी दौरान पंजाब से प्रेरणादायक खबर आई कि फगवाड़ा की 61 वर्षीय नरिंदर कौर ने सेकेंडरी परीक्षा बेहतरीन अंकों से पास की। ऐसी खबरों से जैसे एक संदेश निकला हो, जिसे किसी शायर ने इस तरह से बयां किया है, ‘जो अपना कल तुम्हें बेहतर बनाना है। समझ लो बेटियों को फिर पढ़ाना है।’
सीबीएसई की दोनों ही बोर्ड परीक्षाओं यानी 10वीं और 12वीं में बेटियों ने ही बाजी मारी। इनमें लड़कियों का उत्तीर्ण प्रतिशत क्रमश: लगभग 95 और 88.86 रहा, जबकि लड़कों का 93 और 82.13 फीसदी। इसी तरह पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पीएसईबी) की 12वीं की परीक्षा में लड़कियों ने शीर्ष तीन स्थानों पर कब्जा जमाया। वह भी शत प्रतिशत अंकों के साथ। पीएसईबी ने घोषणा की कि लड़कियों का उत्तीर्ण प्रतिशत 94.73 रहा, जबकि लड़कों का 88.52 प्रतिशत। इसी तरह हरियाणा स्कूल शिक्षा बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में लड़कियों के उत्तीर्ण होने का प्रतिशत 87.97 रहा, जबकि लड़कों का 81.45 प्रतिशत। तीनों विषयों में शीर्ष अंक प्राप्त करने वाली भी बेटियां ही रहीं। करिअर पथ की पहली और दूसरी सीढ़ी यानी 10वीं और 12वीं में अव्वल रहने वाली बेटियों का सिलसिला हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से लेकर महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के साथ विभिन्न राज्यों में रहा। बेहतरीन अंक लाने वाली इन बेटियों के आंखों में सतरंगी सपने हैं। कोई आईएएस अफसर बनना चाहती है, तो किसी ने स्पोर्ट्स की दुनिया में नाम कमाना है। किसी का सपना सैन्य अफसर बनने का है तो कुछ बेटियां आईपीएस अधिकारी बनकर कानून और व्यवस्था को दुरुस्त करने की बात करती हैं।
बेशक आज हमारे यहां बेटियों के लिए भी खुला आसमान है, लेकिन अब भी ज्यादातर मामलों में बेटियों के सपने चहारदीवारी में दम घोट देते हैं। आशाजनक संकेत हैं कि बेटियों के मंजिल पाने की इस ललक में अब माता-पिता भी खुलकर साथ दे रहे हैं। हालांकि अभी स्थिति पूरी तरह सुखद नहीं है, लेकिन अब बेटियों को दंश समझने और उनका ‘ऊल-जलूल’ नाम रखने का सिलिसला थमने लगा है। सभी जानते हैं कि हाल ही तक बेटियों के नाम भतेरी, काफी, माफी, अंतिम जैसे रखे जाते थे। लेकिन हौसला देखिए कि ऐसे नामों की बेटियों ने भी आगे चलकर उन्हीं मां-बाप का नाम रोशन किया जिन्होंने उन्हें ‘अनचाहा’ कहा। बेटियां जब आकाश छूती हैं तो सारा जहां जैसे उत्सव में तब्दील हो जाता है। उसी तरह जैसे किसी ने कहा है, ‘फूल ख़ुशबू उन पे उड़ती तितलियों की ख़ैर हो, सब के आंगन में चहकती बेटियों की ख़ैर हो।’

