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Dalit Student Death : रोहित वेमुला की 10वीं बरसी पर राहुल गांधी की तीखी टिप्पणी, कहा- शिक्षा में बराबरी का सपना अभी भी अधूरा

भारत में जाति अभी भी सबसे बड़ा प्रवेश फॉर्म, भेदभाव विरोधी कानून की जरूरत: राहुल

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राहुल गांधी।
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Dalit Student Death Dispute : दलित छात्र रोहित वेमुला की मौत के दस साल पूरे होने के मौके पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के युवाओं की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है और देश में भेदभाव विरोधी कानून की सख्त जरूरत है। हैदराबाद विश्वविद्यालय के 26 वर्षीय छात्र रोहित ने संस्थान में कथित उत्पीड़न के बाद 17 जनवरी 2016 को खुदकुशी कर ली थी, जिसके बाद उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवाद के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन शुरू हो गया था। इन विरोध-प्रदर्शनों में राहुल सहित कांग्रेस के कई नेता भी शामिल हुए थे।

राहुल ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि आज रोहित वेमुला को गए 10 साल हो गए। लेकिन रोहित का सवाल आज भी हमारे सीने में धड़क रहा है : क्या इस देश में सबको सपने देखने का बराबर हक है? रोहित पढ़ना चाहता था, लिखना चाहता था। वह विज्ञान, समाज और इंसानियत को समझकर इस मुल्क को बेहतर बनाना चाहता था लेकिन इस व्यवस्था को एक दलित का आगे बढ़ना मंजूर नहीं था। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि संस्थागत जातिवाद, सामाजिक बहिष्कार, रोज-रोज की बेइज्जती, औकात दिखाने वाली भाषा और अमानवीय व्यवहार-यही वह जहर था, जिसने एक होनहार युवा को उस मुकाम तक धकेल दिया, जहां उसकी गरिमा छीन ली गई और उसे अकेला कर दिया गया।

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उन्होंने लिखा कि और आज? क्या दलित युवाओं की हकीकत बदली है? शिक्षण संस्थानों में वही तिरस्कार, छात्रावास में उसी तरह से अलग-थलग किया जाना, कक्षा में कमतर समझा जाना, फिर वही हिंसा-और कभी-कभी वही मौत। क्योंकि जाति आज भी इस देश का सबसे बड़ा प्रवेश फॉर्म है इसलिए रोहित वेमुला अधिनियम कोई नारा नहीं, बल्कि जरूरत है, ताकि शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव अपराध बने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और किसी भी छात्र को उसकी जाति के नाम पर तोड़ने, चुप कराने या बाहर करने की छूट खत्म हो।

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उन्होंने कहा कि यह सिर्फ संसद के भीतर की लड़ाई नहीं है। यह शिक्षण संस्थानों के भीतर युवाओं की लड़ाई है। यह हमारी लड़ाई है। राहुल ने दलित युवाओं का आह्वान करते हुए लिखा कि आवाज उठाओ, संगठन बनाओ, एक-दूसरे के साथ खड़े रहो। मांग करो कि रोहित वेमुला अधिनियम अभी लागू किया जाएगा। भेदभाव विरोधी कानून अभी लाया जाए। कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी की सरकारें इस कानून को जल्द से जल्द लागू करने की प्रक्रिया में हैं। हम एक ऐसा भारत चाहते हैं, जहां न्याय, मानवता और समानता हो, जहां किसी दलित छात्र को अपने सपनों की कीमत जान देकर न चुकानी पड़े। रोहित, तुम्हारी लड़ाई हमारी जिम्मेदारी है।

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