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दैनिक ट्रिब्यून के संपादक नरेश कौशल को मिला स्काउटिंग का सर्वोच्च सम्मान

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने ‘सिल्वर एलीफेंट’ से किया अलंकृत, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को भी मिला सम्मान

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राज्यपाल रमेन डेका दैनिक ट्रिब्यून के संपादक नरेश कौशल को ‘सिल्वर एलीफेंट अवॉर्ड’से सम्मानित करते हुए। ट्रिब्यून फोटो
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National Rover-Ranger Jamboree: भारत स्काउट्स एवं गाइड्स की प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जम्बूरी के ऐतिहासिक मंच पर शुक्रवार को पत्रकारिता, राजनीति और स्काउटिंग के मूल्यों का अनूठा संगम देखने को मिला। यहां आयोजित एक गरिमामय समारोह में ‘दैनिक ट्रिब्यून’ के संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार नरेश कौशल को भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान ‘सिल्वर एलीफेंट अवॉर्ड’ से विभूषित किया गया।

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जम्बूरी के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने कौशल को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। इसी मंच पर छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को भी संगठन के प्रति उनकी सेवाओं के लिए ‘सिल्वर एलीफेंट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया।

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ध्वजारोहण समारोह के दौरान संगठन के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त डॉ. केके खंडेलवाल के साथ दैनिक ट्रिब्यून’ के संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार नरेश कौशल व अन्य। ट्रिब्यून फोटो
ध्वजारोहण समारोह के दौरान संगठन के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त डॉ. केके खंडेलवाल के साथ दैनिक ट्रिब्यून’ के संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार नरेश कौशल व अन्य। ट्रिब्यून फोटो

वरिष्ठ पत्रकार नरेश कौशल को यह सम्मान स्काउट-गाइड आंदोलन के प्रति उनके छह दशकों से अधिक के समर्पण और युवाओं के चरित्र निर्माण में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है। सम्मान पत्र में रेखांकित किया गया कि कौशल ने अपनी लेखनी और पत्रकारिता के माध्यम से सेवा, अनुशासन और राष्ट्रनिर्माण के मूल्यों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में महती भूमिका निभाई है।

इस उपलब्धि पर भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के अध्यक्ष डॉ. अनिल जैन और मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त डॉ. केके खंडेलवाल ने कौशल को हार्दिक बधाई दी और इसे संगठन के लिए गौरव का क्षण बताया। सम्मान ग्रहण करने के उपरांत कौशल ने डॉ. खंडेलवाल के साथ संयुक्त रूप से जम्बूरी ध्वज का ध्वजारोहण किया और परेड की जनरल सैल्यूट ली।

1964 का वह दौर : जब दिग्गज अभिनेता ओम पुरी के साथ साझा किया था टेंट

सम्मान प्राप्त करने के बाद भावुक हुए संपादक नरेश कौशल ने अपनी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि स्काउटिंग उनके जीवन का आधार है। उन्होंने याद किया कि वर्ष 1964 में इलाहाबाद में आयोजित चौथी राष्ट्रीय जम्बूरी में वह एक साधारण स्काउट के रूप में शामिल हुए थे। उस समय उनके साथ उनके बाल सखा और बाद में प्रख्यात फिल्म अभिनेता बने स्वर्गीय ओम पुरी भी मौजूद थे। उन्होंने कहा, 'वही अनुभव मेरे जीवन की दिशा तय करने वाला सिद्ध हुआ और देशभक्ति व अनुशासन के संस्कार मेरे व्यक्तित्व का हिस्सा बन गए।'

15 हजार युवाओं के बीच सादगी की मिसाल

वरिष्ठ पत्रकार कौशल ने जम्बूरी में सादगी की मिसाल पेश की। वह किसी वीआईपी गेस्ट हाउस के बजाय प्रकृति की गोद में, एक तंबू में ठहरे। उन्होंने देश के 54 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और रेलवे जोन से आए लगभग 15,000 रोवर्स और रेंजर्स के साथ सीधा संवाद किया। उन्होंने जम्बूरी परिसर में पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के कैंपों का निरीक्षण किया। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन और प्राथमिक उपचार को वर्तमान समय की सबसे बड़ी सेवा बताया।

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