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Cyber ​​Fraud: नकली कोर्ट आदेश के सहारे साइबर अपराधियों ने बैंक को लगाया लाखों का चूना

Cyber ​​Fraud: केरल में साइबर ठगों द्वारा कथित तौर पर फर्जी अदालती और पुलिस दस्तावेजों के जरिए बैंक अधिकारियों को धोखा देकर जब्त किए गए छह बैंक खातों को दोबारा सक्रिय कराने और उनसे धनराशि स्थानांतरित कराने का मामला सामने...

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फ़ाइल फ़ोटो
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Cyber ​​Fraud: केरल में साइबर ठगों द्वारा कथित तौर पर फर्जी अदालती और पुलिस दस्तावेजों के जरिए बैंक अधिकारियों को धोखा देकर जब्त किए गए छह बैंक खातों को दोबारा सक्रिय कराने और उनसे धनराशि स्थानांतरित कराने का मामला सामने आया है। पुलिस ने शनिवार को बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

तिरुवनंतपुरम सिटी साइबर पुलिस ने 25 जून को वझुथाकौड स्थित एक निजी बैंक के प्रबंधक की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार, विभिन्न आपराधिक मामलों की जांच के सिलसिले में साइबर पुलिस के अनुरोध पर पहले कई बैंक खातों पर रोक लगा दी गई थी।

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इस वर्ष अप्रैल में बैंक को एक ऐसा ईमेल प्राप्त हुआ, जिसका पता तिरुवनंतपुरम सिटी साइबर पुलिस की आधिकारिक ईमेल आईडी से मिलता-जुलता था। इस ईमेल के साथ साइबर पुलिस के 'लेटरहेड' पर तैयार किया गया फर्जी पत्र, एक जाली कानूनी नोटिस तथा अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय, तिरुवनंतपुरम की कथित मुहर और फर्जी हस्ताक्षर वाला जाली अदालती आदेश संलग्न था।

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ईमेल में बैंक को निर्देश दिया गया था कि छह खातों पर लगाई गई रोक को तत्काल हटाएं और उनमें से 66,452 रुपये मध्य प्रदेश के एक अन्य बैंक में स्थित खाते में स्थानांतरित कर दे।

पुलिस ने बताया कि इसके बाद भी उसी फर्जी ईमेल आईडी से कई ईमेल भेजे गए, जिनमें कथित अदालत के आदेश का बिना किसी देरी के पालन करने का दबाव बनाया गया। हाल ही में बैंक अधिकारियों को पता चला कि ईमेल और उससे जुड़े सभी दस्तावेज फर्जी थे, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बैंक से यह जानकारी मांगी गई है कि फर्जी ईमेल मिलने के बाद उसने क्या कार्रवाई की थी। साथ ही, जिस बैंक खाते में धनराशि भेजी गई उसका पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

पुलिस संबंधित खाताधारकों का विवरण भी जुटा रही है और इस पूरे मामले में शामिल सभी लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों की पहचान कर ली जाएगी।

इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी  अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत धोखाधड़ी, प्रतिरूपण के जरिए धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेज को असली बताकर इस्तेमाल करना, न्यायालय के अभिलेखों में जालसाजी तथा कूटरचना जैसे आरोपों में मामला दर्ज किया गया है।

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