अदालतों को ट्राॅमा सेंटर की तरह 24 घंटे तैयार रहना होगा
हिसार बार एसोसिएशन के समारोह में पहुंचे सीजेआई सूर्यकांत ने कहा-
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत ने शुक्रवार को कहा कि न्यायालयों को भी अस्पताल एवं ट्राॅमा सेंटर की तरह दिन के 24 घंटे, सप्ताह के सातों दिन इमरजेंसी सेवा में तैयार रहना होगा।
हिसार बार एसोसिएशन के समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘हमें यह चाहिए कि न्याय चाहने वाले को अगर इमरजेंसी सर्विस की जरूरत है, तो हम उसके लिए तैयार रहें। हम उसके लिए तभी तैयार हो सकते हैं, जब हमारे पास जरूरी आधारभूत ढांचा मौजूद हो। इसलिए, मैं जहां भी जा रहा हूं, वहां राज्य सरकारों और अन्यों से अपील कर रहा हूं कि कृपया न्यायिक व्यवस्था को आधारभूत ढांचा देने व उसको अपडेट करने के बारे में सोचें। यह सिर्फ एक सुविधा नहीं है, बल्कि सिस्टम की सबसे बड़ी जरूरत है ताकि सही और समय पर न्याय मिल सके।’
सीजेआई सूर्यकांत की पत्नी सविता कांत, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू, उनकी पत्नी नित्या नागू, जस्टिस एचएस सेठी, जस्टिस अल्ाका सरीन, जिला एवं सत्र न्यायाधीश अल्ाका मलिक, हिसार बार के प्रधान एडवोकेट संदीप बूरा, महाचिव समीर भाटिया भी समारोह में मंच पर उपस्थित रहे।
सीजेआई ने हिसार में अपनी वकालत की शुरुआत का जिक्र करते हुए बताया कि 20 अप्रैल, 1984 को उनकी लॉ की पढ़ाई का आखिरी पेपर था और अगले दिन वह हिसार बार में आ गए, जहां वरिष्ठ अधिवक्ताओं का खूब साथ मिला।
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हॉल की जिस सीट पर बैठते थे, उसको देखने गए
सीजेआई सूर्यकांत हिसार बार में प्रैक्टिस के दौरान हॉल की जिस सीट पर बैठते थे, उसे देखने गए और पुराने दिनों को याद किया। इस दौरान हाईकोर्ट के जस्टिस, जिला न्यायालय के न्यायाधीश, उनके पुराने साथी व बार के पदाधिकारी भी उनके साथ थे। मंच से संबोधन के दौरान सीजेआई अपने वरिष्ठ अधिवक्ता के मुंशी को याद करना नहीं भूले, जिसने उनको ‘तलवाना भरवाना’ सिखाया था। उनके मुंशी रहे प्रदीप भाटिया को जिला बार एसोसिएशन ने विशेष तौर पर आमंत्रित किया।
जिला जज की सलाह ने बदल दी तस्वीर :
सीजेआई सूर्यकांत ने बताया कि उनके सीनियर एडवोकेट आत्माराम बंसल ने अपने एक सिविल केस की अपील में बहस करने के लिए उनको भेजा था। बहस के बाद जिला जज ने बार के वरिष्ठ अधिवक्ताओं को बुलाकर कहा कि इस लड़के को यहां खराब मत करो, हाईकोर्ट भेज दो। इसके बाद सभी ने उनको हाईकोर्ट जाने के लिए कहा और वरिष्ठ अधिवक्ता देवराज संधीर अपनी कार में उनको चंडीगढ़ छोड़ने गए।
हांसी (पंकज नागपाल) :
सीजेआई सूर्यकांत ने शुक्रवार को हांसी बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में भी शिरकत की। हांसी जिले के पेटवाड़ गांव के रहने वाले सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘हांसी से मेरी यादें जुड़ी हैं। मेरे पिताजी की यहां ड्यूटी थी। मैंने पहली फिल्म हांसी में ही देखी थी। चोरी-छिपे नहीं, बल्कि पिताजी मुझे साइकिल पर लेकर गए थे। मैं जब भी हांसी से गुजरता हूं, बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं।’ कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा, विधायक विनोद भयाना, एडीजे गगनदीप समेत अन्य लोगों ने सीजेआई का हांसी पहुंचने पर स्वागत किया।
हांसी में पहली फिल्म देखी, पिताजी साइकिल पर लेकर गए थे
सीजेआई ने हांसी को जिला बनाने पर विधायक भयाना को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह काफी पुरानी मांग थी। सीजेआई ने कहा कि वह हाईकोर्ट से निवेदन करेंगे कि इसे सेशन डिवीजन घोषित किया जाए। हांसी बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में बार प्रधान पवन रापड़िया ने सीजेआई का स्वागत किया।
सीजेआई ने कहा कि हांसी मेरी जन्मभूमि, कर्मभूमि और भावनात्मक भूमि है। ज्यूडिशियल इंस्टीट्यूशन की भलाई के लिए मैं कुछ भी कर सकूं, आप इसके लिए मुझसे मिल या लिख सकते हैं।
इस दौरान डीसी राहुल नरवाल, एसपी अमित यशवर्धन, एसडीएम राजेश खोथ भी मौजूद रहे।
वकीलों को एडवांस बनने की सलाह :
सीजेआई ने बार के कार्यक्रम में कहा, मेरा अनुरोध है कि सब डिवीजन और डिस्ट्रिक्ट लेवल पर वकील बड़े शहरों के वकीलों की तरह मॉडर्न-डे चैलेंज को स्वीकार करें। टेक्नोलाॅजी के अनुरूप एडवांस होना होगा। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करें। दिल्ली, मुंबई या बाहर के वकील के सामने टिकना है, ऐसा वकील बनना होगा। उन्होंने कहा कि जीवन में चुनौतियों को स्वीकारें और सर्वाइव करना सीखें। इस पेशे में जगह बनाने के लिए एक्सपर्ट या ऑलराउंडर बनना पड़ेगा।
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हमारा ज्यूडिशरी सिस्टम दुनियाभर में नंबर वन :
सीजेआई ने कहा कि दुनिया में हमारा ज्यूडिशरी सिस्टम नंबर वन है। यहां के मुकाबले ज्यूडिशरी सिस्टम और कहीं का नहीं है। दूसरे देश हमारे साथ एमओयू कर रहे हैं। उन्हाेंने कहा कि हांसी का वकील इंग्लैंड के केस को भी देख और सीख सके, ऐसी चीजें अपनाएं। ग्लोबल लेवल के वकील बनें। भाषा की बाधा आपके रास्ते में नहीं आनी चाहिए। मैं चाहता हूं कि ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े बार भी प्रतिस्पर्धा में आएं। अच्छी ई-लाइब्रेरी होनी चाहिए।
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फोटो कैप्शन : हांसी में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को स्मृति चिन्ह प्रदान करते बार प्रधान पवन रापड़िया।

