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Parliament Special Session : महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में गिरा, सरकार को नहीं मिला 2/3 बहुमत

विधानसभाओं, जम्मू कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेशों में महिला आरक्षण लागू करने की अधिसूचना जारी

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Parliament Special Session : लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया। सदन में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े।

लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। सरकार ने इस विधेयक के साथ 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका।

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संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने के बाद अब इससे संबंधित दोनों विधेयकों 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को आगे नहीं बढ़ा सकते।

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इससे पहले, संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन, विपक्षी नेताओं द्वारा महिला आरक्षण कानून से जुड़े प्रस्तावित परिसीमन ढांचे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखे हमले करने के कारण माहौल तनावपूर्ण रहा। थरूर ने कहा कि प्रधानमंत्री कहते हैं कि सरकार ने ‘नारी शक्ति’ को न्याय का उपहार दिया है, लेकिन यह कांटेदार तार में लिपटा हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि महिला आरक्षण जैसे “नैतिक अनिवार्यता” को एक जटिल जनसांख्यिकीय समस्या से क्यों जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा करने से भारतीय महिलाओं की आकांक्षाएं एक जटिल और विवादास्पद प्रशासनिक प्रक्रिया की बंधक बन जाएंगी।

केंद्रीय मंत्री और जेडी(एस) नेता एच डी कुमारस्वामी ने शुक्रवार को महिला आरक्षण कानून में संशोधन करने वाले विधेयकों के विरोध में डीएमके के तर्कों को "भय फैलाने वाला" बताया और कहा कि ये दक्षिणी राज्यों के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। कुमारस्वामी ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी, जिन्हें जाति आधारित आरक्षण की कोई समझ नहीं है, ने एक समय तर्क दिया था कि आरक्षण जातिगत जनसंख्या के अनुपात में होना चाहिए, लेकिन अब वे इसी तर्क को संसदीय प्रतिनिधित्व पर लागू नहीं करना चाहते।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि संविधान संशोधन विधेयक का महिला आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि यह सरकार द्वारा दक्षिणी, पूर्वोत्तर और छोटे राज्यों से प्रतिनिधित्व छीनकर देश के चुनावी मानचित्र को बदलने का प्रयास है, जो राष्ट्र-विरोधी कृत्य से कम नहीं है। यह महिला विधेयक नहीं है क्योंकि इसका महिला सशक्तिकरण से कोई संबंध नहीं है। यह विधेयक भारत की महिलाओं का इस्तेमाल करके और उनकी आड़ में छिपकर देश के चुनावी मानचित्र को बदलने का प्रयास है।

राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को 2023 के महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने के लिए वापस लाना चाहिए और विपक्ष इसे तुरंत पारित करने में सरकार की मदद करेगा। उन्होंने सरकार पर ओबीसी को सत्ता और प्रतिनिधित्व देने से बचने का आरोप लगाया और कहा कि यही उसका असली एजेंडा है। सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि अगले 15 वर्षों तक जाति जनगणना का प्रतिनिधित्व से कोई संबंध न हो। वे अपनी शक्ति के क्षरण से भयभीत हैं और भारतीय राजनीतिक मानचित्र को बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

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