West Asia Conflict : 'विश्वगुरु' के दावे पर कांग्रेस का तंज: पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की मध्यस्थता को बताया भारत के लिए 'बड़ा झटका'
कूटनीतिक मोर्चे पर रार
West Asia Conflict : पश्चिम एशिया में चल रहे भारी तनाव के बीच अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच मध्यस्थता की खबरों को लेकर देश में सियासत गर्मा गई है। कांग्रेस ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि पाकिस्तान इन देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, तो यह भारत के लिए एक "बड़ा झटका" और स्वघोषित "विश्वगुरु" की छवि पर करारी चोट है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए सोशल मीडिया पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रमुख वैश्विक मीडिया संस्थानों ने पाकिस्तान को उन मध्यस्थों में से एक बताया है, जो एक तरफ अमेरिका-इजरायल और दूसरी तरफ ईरान के बीच कड़ी का काम कर रहे हैं। रमेश के अनुसार, यह स्थिति मोदी सरकार की कूटनीतिक विफलता को दर्शाती है।
'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद कूटनीति में पिछड़ा भारत
कांग्रेस नेता ने कहा कि भले ही भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' में निर्विवाद सैन्य सफलता हासिल की हो, लेकिन उसके बाद की कूटनीतिक और नैरेटिव मैनेजमेंट के मामले में पाकिस्तान, मोदी सरकार से कहीं आगे निकल गया है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान जो कभी राजनीतिक और आर्थिक रूप से बदहाल स्थिति में था, उसे अब नया जीवन मिल गया है।
जयराम रमेश ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने उस व्यक्ति को गले लगाया है जिसकी भड़काऊ बयानबाजी 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि थी। इतना ही नहीं, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की व्हाइट हाउस में दो बार मेजबानी की गई, जो भारत के लिए चिंता का विषय है।
पीएम की 'हगलोमेसी' पर उठाए सवाल
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल यात्रा को भी "गलत चुनाव" करार दिया। रमेश ने कहा कि ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हवाई हमलों से ठीक दो दिन पहले पीएम की इजरायल यात्रा ने भारत को उस स्थिति से पीछे धकेल दिया, जहां हम मध्यस्थता कर सकते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की 'हगलोमेसी' (गले मिलने की कूटनीति) अब बेनकाब हो गई है और देश को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है।
बातचीत की मेज पर पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को पुष्टि की थी कि अमेरिका ईरान के एक "सम्मानित नेता" के साथ बातचीत कर रहा है। हालांकि उन्होंने नाम का खुलासा नहीं किया, लेकिन अमेरिकी सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि पिछले दो दिनों से पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र लगातार अमेरिका और ईरान के बीच संदेशों का आदान-प्रदान कर रहे हैं।
गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हुए भीषण हमलों के बाद से पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। इस युद्ध को रोकने के लिए अब वैश्विक स्तर पर जो प्रयास हो रहे हैं, उनमें भारत की भूमिका न होने को विपक्ष सरकार की बड़ी कमजोरी बता रहा है।

