Parliament Monsoon Session: सत्रावसान न होने पर कांग्रेस ने उठाया सवाल,कहा- सरकार की मंशा कुछ और तो नहीं
Parliament Monsoon Session: लोकसभा-राज्यसभा 13 अगस्त को अनिश्चित काल के लिए स्थगित हुईं, 10 दिन बाद भी सत्रावसान की अधिसूचना नहीं
Parliament Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र के अवसान में हो रही देरी पर सवाल उठाते हुए, कांग्रेस ने रविवार को पूछा कि क्या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अब भी उस ''दागदार'' दो-तिहाई बहुमत की तलाश में हैं, जिससे वे एक विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पारित करा सकें।
लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही 13 अगस्त को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई थी। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित होने और उसके सत्रावसान (औपचारिक समाप्ति) के बीच आमतौर पर दो से चार दिन का अंतर होता है, हालांकि ऐसे भी कई उदाहरण हैं जब सत्र स्थगन और सत्रावसान एक ही दिन हुए हैं।
रमेश ने बताया कि लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित हुए दस दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी भी इसके सत्रावसान के बारे में कोई जानकारी नहीं है। कांग्रेस नेता ने 'एक्स' पर कहा, ''यह सच है कि 2015 में मानसून सत्र के दौरान यह अंतर 28 दिन का था और 2021 में 20 दिन का। लेकिन तब कोई बुरी मंशा वाली चालें नहीं चली जा रही थीं।''
रमेश ने कहा, ''अब इतनी असामान्य देरी क्यों हो रही है? क्या केंद्रीय गृह मंत्री अभी भी उस 'दागदार' दो-तिहाई बहुमत की तलाश में हैं ताकि एक विशेष सत्र में परिसीमन पर संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराया जा सके?'' उन्होंने सदन के सत्रावसान की प्रक्रिया को समझाने के लिए संसद की कार्य प्रणाली और नियमावली पर आधारित एम.एन. कौल और एस.एल. शकधर की किताब ''प्रैक्टिस एंड प्रोसीजर ऑफ पार्लियामेंट'' के एक पेज का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया।
पुस्तक में लिखा है, ''अनुच्छेद 85(2) के तहत राष्ट्रपति के आदेश से सदन के सत्र की समाप्ति को सत्रावसान कहा जाता है। सदन का सत्रावसान करने की शक्ति का इस्तेमाल करते समय राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर काम करते हैं। राष्ट्रपति को सलाह देने से पहले प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल से सलाह-मशविरा कर सकते हैं।'' उन्होंने कहा, ''सदन का सत्रावसान कभी भी हो सकता है, यहां तक कि सदन की कार्यवाही चलने के दौरान भी। हालांकि, आमतौर पर सदन की बैठक अनिश्चित काल के लिए स्थगित होने के बाद ही सत्रावसान होता है।''
किताब में कहा गया है, ''सदन के सत्रावसान और नए सत्र के बीच के समय को 'इंटर-सेशन पीरियड' (अंतर-सत्र अवधि) कहा जाता है।'' कांग्रेस ने पहले कहा था कि यह विपक्ष की ''कामयाबी'' थी कि ''दागदार'' दो-तिहाई बहुमत पाने की कोशिश सफल नहीं हो सकी और परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं कराया जा सका।
दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित होने के बाद रमेश ने कहा था, ''उनके पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है और उन्हें कभी नहीं मिलेगा।'' कांग्रेस ने पिछले सप्ताह लोकसभा की मौजूदा सीट संख्या 543 को अगले 25 साल तक स्थिर रखने की मांग की और कहा कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू किया जाए।
विपक्षी पार्टी ने यह बात यहां इंदिरा भवन में कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के बाद कही। बैठक के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए रमेश ने कहा कि परिसीमन के मामले में, कांग्रेस अगले 25 साल तक लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या 543 को यथावत बनाए रखने के पक्ष में है। रमेश ने कहा, ''साथ ही, हम इसी संख्या पर महिला आरक्षण लागू करने की मांग करते हैं।''
बैठक में पारित किए गए एक प्रस्ताव में, सीडब्ल्यूसी ने महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने के अपने संकल्प को दोहराया। गत 17 अप्रैल को संसद के बजट सत्र के दौरान, मोदी सरकार को झटका लगा था और लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक निचले सदन में गिर गया।
लोकसभा में विधेयक पर मत विभाजन में भाग लेने वाले 528 सांसदों में से 298 ने इसके पक्ष में वोट दिया, जबकि 230 ने इसका विरोध किया। संविधान संशोधन विधेयक पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत के हिसाब से 352 सदस्यों के वोट की जरूरत थी।

