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Foreign Policy : पश्चिम एशिया में संघर्ष विराम से मोदी सरकार की विदेश नीति बेनकाब: कांग्रेस

जयराम रमेश ने कहा-पाकिस्तान की मध्यस्थता भारत के लिए कूटनीतिक झटका

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कांग्रेस नेता जयराम रमेश
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Foreign Policy :  पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल गुट और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के संघर्ष विराम को कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार के लिए एक बड़ी कूटनीतिक विफलता करार दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बुधवार को कहा कि इस घटनाक्रम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की वास्तविक स्थिति को "बेनकाब" कर दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वैश्विक तनाव कम हो रहा है, तब भारत की कूटनीतिक रणनीति कहीं नजर नहीं आ रही।

जयराम रमेश ने कहा कि पूरी दुनिया पश्चिम एशिया में हुए इस संघर्ष विराम का स्वागत करेगी, लेकिन संकट के दौरान भारत की भूमिका और स्थिति ने गंभीर चिंताएं पैदा की हैं। उन्होंने याद दिलाया कि यह संघर्ष 28 फरवरी, 2026 को वरिष्ठ ईरानी हस्तियों की लक्षित हत्याओं के साथ शुरू हुआ था। यह सब प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल यात्रा के तुरंत बाद हुआ, लेकिन सरकार ने गाजा और वेस्ट बैंक की स्थिति पर कोई प्रभावी प्रतिक्रिया नहीं दी।

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पाकिस्तान की मध्यस्थता ने बढ़ाई चिंता

कांग्रेस नेता ने इस संघर्ष विराम में पाकिस्तान की कथित भूमिका पर भी सरकार को घेरा। रमेश ने कहा कि पाकिस्तान जैसे गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे देश ने संघर्ष विराम कराने में मध्यस्थता की है, जो भारत की विदेश नीति के लिए एक बड़ा झटका है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने के दावे करती रही है, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम इसके ठीक उलट संकेत दे रहे हैं।

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उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में मुंबई आतंकी हमलों के बाद भारत की राजनयिक पहुंच कहीं अधिक मजबूत थी। पाकिस्तान की इस सक्रियता ने भारत की कूटनीतिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

'ऑपरेशन सिंदूर' के अचानक बंद होने पर मांगा जवाब

सरकार की नीतियों पर हमला जारी रखते हुए जयराम रमेश ने मई 2025 में 'ऑपरेशन सिंदूर' को अचानक रोके जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि इस ऑपरेशन को बंद करने की पहली घोषणा भारत के बजाय अमेरिका की ओर से आई थी। कांग्रेस ने सवाल किया कि इस कदम के पीछे की वजहें क्या थीं और सरकार ने अब तक इसे स्पष्ट क्यों नहीं किया है।

वैश्विक मंच पर कमजोर हुई भारत की स्थिति?

जयराम रमेश ने कहा कि दुनिया ने राहत की सांस ली है, लेकिन भारत की चुप्पी और अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव में कमी निराशाजनक है। उन्होंने विदेश मंत्री द्वारा पाकिस्तान पर दिए गए बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार प्रमुख घटनाक्रमों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने में विफल रही है।

उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि अमेरिका और ईरान एक "निश्चित" शांति समझौते की दिशा में बातचीत कर रहे हैं। इसी बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए दो सप्ताह के संघर्ष विराम पर सहमति बनी है।

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