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CM भगवंत मान का रवनीत बिट्टू पर तंज: ‘जल्द जाएगी मंत्री पद और राज्यसभा सीट’, दोस्ती से सियासी दुश्मनी तक पहुंचा मामला

Mann VS Bittu: कभी थे करीबी दोस्त, अब चुनावी राजनीति में आमने-सामने; धूरी और संगरूर की सियासत ने बढ़ाई तल्खी

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Mann VS Bittu:  पंजाब की राजनीति में कभी गहरी दोस्ती के लिए चर्चित रहे मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच अब सियासी टकराव खुलकर सामने आ गया है। मुख्यमंत्री मान ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में बिट्टू पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि वह जल्द ही अपना मंत्री पद और राज्यसभा सीट दोनों गंवा सकते हैं।

भगवंत मान ने कहा कि भाजपा नेतृत्व ने रवनीत बिट्टू को विधानसभा चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक ताकत साबित करने के लिए कहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “इसी वजह से वह कह रहे हैं कि बहुत हो गया राज्यसभा और लोकसभा।”

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राजनीतिक गलियारों में यह बयान इसलिए भी चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि मान और बिट्टू कभी बेहद करीबी मित्र माने जाते थे। आम आदमी पार्टी के 2022 में सत्ता में आने और भगवंत मान के मुख्यमंत्री बनने से पहले ही दोनों नेताओं के बीच अच्छे संबंध थे। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच निजी और राजनीतिक मुद्दों पर नियमित बातचीत होती थी।

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हालांकि समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियां बदलती गईं और अब आम आदमी पार्टी तथा भारतीय जनता पार्टी के बीच बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का असर उनके व्यक्तिगत संबंधों पर भी दिखाई देने लगा है।

दोनों नेताओं के बीच तनाव उस समय खुलकर सामने आया जब हाल ही में हुए शहरी निकाय चुनावों के दौरान रवनीत बिट्टू संगरूर और धूरी पहुंचे। उन्होंने भाजपा नेता प्रोफेसर ओंकार सिंह का समर्थन किया, जिन्हें चुनावी क्षेत्र में कथित रूप से नियमों के उल्लंघन के आरोप में पुलिस ने हिरासत में लिया था।

प्रोफेसर ओंकार सिंह कभी भगवंत मान के बेहद करीबी सहयोगी माने जाते थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद मान ने उन्हें अपना ओएसडी नियुक्त किया था, लेकिन बाद में उन्हें पद से हटा दिया गया। इसके बाद ओंकार सिंह भाजपा में शामिल हो गए और धूरी क्षेत्र में सक्रिय राजनीति करने लगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के विधानसभा क्षेत्र धूरी में रवनीत बिट्टू द्वारा ओंकार सिंह का समर्थन करना मान को पसंद नहीं आया, जिसके बाद दोनों नेताओं के संबंधों में खटास और बढ़ गई।

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच यह सियासी बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है। कभी दोस्ती के लिए मिसाल माने जाने वाले भगवंत मान और रवनीत बिट्टू अब पंजाब की राजनीति में अलग-अलग मोर्चों पर आमने-सामने नजर आ रहे हैं।

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