CJP के संसद मार्च पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका, आज सुनवाई संभव
स्वतंत्र जांच, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने और जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान की मांग; हाईकोर्ट ने मंगलवार को तत्काल सुनवाई से किया इनकार
CJP Delhi HC PIL : संसद मार्च के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गई है। हाईकोर्ट ने मंगलवार को मामले की तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। मामले पर बुधवार को सुनवाई होने की संभावना है।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ के समक्ष याचिका का उल्लेख कर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया। इस पर पीठ ने मौखिक रूप से कहा, "कोर्ट को इन सब में मत घसीटिए। मामला कल आएगा।"
प्रदर्शनकारी एवं अधिवक्ता अंशुल कुमार की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि मामला संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार से जुड़ा है। याचिका के अनुसार सोमवार को संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर कथित रूप से लाठीचार्ज किया, मारपीट की, उन्हें घसीटा, जबरन हटाया और एहतियाती हिरासत में लिया। याचिकाकर्ता का दावा है कि इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए।
महिलाओं, बुजुर्गों और मीडिया कर्मियों पर भी बल प्रयोग का आरोप
अधिवक्ता इंदर देव सिंह और यश कुमार के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध वीडियो, तस्वीरें, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और मीडिया रिपोर्ट प्रथम दृष्टया महिलाओं, बुजुर्गों और मीडिया कर्मियों सहित प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के आरोपों की ओर संकेत करते हैं। याचिका में घायलों की वास्तविक संख्या, चोटों की प्रकृति और घटना की परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि कार्रवाई के दौरान कुछ ऐसे लोग पुलिसकर्मियों के साथ दिखाई दिए, जिन्होंने पुलिस की वर्दी नहीं पहन रखी थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो ऐसे लोगों की पहचान, उनकी भूमिका और पुलिस से उनके संबंधों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
अदालत की निगरानी में जांच समिति गठित करने की मांग
याचिका में कहा गया है कि जब आरोप स्वयं पुलिस पर हों तो केवल विभागीय जांच से निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ सकते हैं। इसलिए सुप्रीम कोर्ट या दिल्ली हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में अदालत की निगरानी में स्वतंत्र तथ्य-खोज समिति गठित करने की मांग की गई है।
इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग, ड्रोन फुटेज, वायरलेस संचार लॉग, ड्यूटी रोस्टर, तैनाती रिकॉर्ड और मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश देने का भी आग्रह किया गया है। याचिका में बल प्रयोग की अनुमति देने वाले अधिकारियों की पहचान, पूरी कमान श्रृंखला (चेन ऑफ कमांड) का खुलासा करने तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई संबंधी दिशा-निर्देशों को और प्रभावी बनाने की भी मांग की गई है।

