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NCERT की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय पर CJI सख्त, बोले- मैं किसी को भी संस्था की छवि धूमिल नहीं करने दूंगा

Judiciary Corruption Textbook Row: कहा- यह एक सोची-समझी चाल प्रतीत होती है

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Judiciary Corruption Textbook Row: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने बुधवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (National Council of Educational Research and Training NCERT) की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शीर्षक से शामिल सामग्री पर स्वत: संज्ञान लिया।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “मैं किसी को भी संस्था की छवि धूमिल नहीं करने दूंगा। मुझे पता है कि इससे कैसे निपटना है… यह एक सोची-समझी चाल प्रतीत होती है।”

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वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने जताई चिंता

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने अदालत से इस मुद्दे पर संज्ञान लेने का अनुरोध करते हुए कहा कि कक्षा 8 के छात्रों को न्यायपालिका को भ्रष्ट बताने वाली सामग्री पढ़ाया जाना गंभीर चिंता का विषय है। इस पर सीजेआई ने कहा कि अदालत पहले ही इस मामले में संज्ञान ले चुकी है और कानून अपना काम करेगा। वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी (A. M. Singhvi) ने भी कहा कि न्यायपालिका को चुनिंदा तौर पर निशाना बनाया गया है।

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किताब में क्या है विवादित?

23 फरवरी को जारी NCERT की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान (भाग-2) की पुस्तक में ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ अध्याय के तहत ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ पर एक खंड जोड़ा गया है।

पुस्तक में बताया गया है कि न्यायाधीश आचार संहिता से बंधे होते हैं और अदालत के भीतर तथा बाहर उनके आचरण को नियंत्रित करने के प्रावधान हैं। इसमें शिकायतों के निवारण के लिए केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) का भी उल्लेख है। किताब के अनुसार, 2017 से 2021 के बीच इस तंत्र के माध्यम से 1,600 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं।

पुस्तक में लंबित मामलों के आंकड़े भी दिए गए हैं। सर्वोच्च न्यायालय में लगभग 81,000 मामले उच्च न्यायालयों में करीब 62.40 लाख मामले। जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में लगभग 4.70 करोड़ मामले।

अध्याय में कहा गया है कि लंबित मामलों की संख्या समस्या का केवल एक हिस्सा है, असली चिंता मामलों के निपटारे में लगने वाला लंबा समय है। कुछ मामलों के 50 वर्षों से अधिक समय तक लंबित रहने का भी उल्लेख किया गया है।

साथ ही, पूर्व सीजेआई बीआर गवई के जुलाई 2025 के वक्तव्य का हवाला दिया गया है, जिसमें उन्होंने पारदर्शिता और जवाबदेही को लोकतांत्रिक मूल्यों का आधार बताया था। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका इस मुद्दे से अवगत है और उचित कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा, “कुछ दिनों का इंतजार कीजिए… मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा। कानून अपना रास्ता खुद तय करेगा।”

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